लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Saturday, 4 January 2014

तेरी यादों के सहारे


तेरी यादों के सहारे
तेरी यादों के सहारे
यूं ही जी रहा हूँ मैं
तेरी यादों के सहारे
यूं ही पी रहा हूँ मैं
कि लोग कहते हैं मुझको
तेरी यादों मे दीवाना
कि तेरी यादों के सहारे
यूं ही सिसक रहा हूँ मैं
पा लूंगा तुझे बाहों मे एक दिन
इसीलिये हर पल सिसक रहा हूँ मैं
कि राहों मे मेरी भी फूल आ जायें कहीं से
यहे सोच जिंदगी को जिए जा रहा हूँ मैं
तू मेरी यादों का आइना है जानेमन
इसीलिए तो तेरी राह यूं ही देख रहा हूँ मैं
तूने मेरी किस्मत मे बिछाए हैं कांटे बहुत से
कि उनमे से भी कुछ फूल चुन रहा हूँ मैं
किस्मत की  धनी  है तू ए मेरी जानेमन
जो तेरे दीदार को यूं ही तरस रहा हूँ मैं
पूछे जो कोई पता तो बताऊँ मैं जानेमन
तेरे दिल के किसी कोने मे धड़क रहा हूँ मैं
मेरी चाह है तेरी बाहों मे मेरी शाम हो जाए
मैं चाहता हूँ तेरे नाम से अनिल बदनाम हो जाए
जियूं तो बनकर अश्क मैं तेरा मरूं तो मेरी मौत
प्यार का पैगाम हो जाए
तेरी यादों के सहारे यूं ही जी रहा हूँ मैं
तेरी यादों के सहारे यूं ही जी रहा हूँ मैं
तेरी यादों के सहारे यूं ही जी रहा हूँ मैं

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