लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Saturday, 4 January 2014

व्यंग्य


व्यंग्य
मैं अपनी पत्नी ने बोलो
तू कितनी शर्मीली है
वो लपककर बोली
तन्ने पता नी
ये तार कितनी कटीली है
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मैं अपनी पत्नी ने बोल्यो
तू मन्ने कोमल सी लागे है
वो बोली
तन्ने पता न होवे
कि मन्नो देख शेर भी
जंगल छोड़ भागे है
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मैं मेरी पत्नी ने बोल्यो
रे चल “ एक था टाइगर “ फिल्लम देख्खन
वे बोली
मैंने एक चूहे के साथ
“एक थी टाइगर “ फिल्लम को नी देखनी


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