लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Thursday, 23 January 2014

सामने समय खड़ा है


सामने समय खड़ा है

सामने समय खड़ा है
हो सके तो पकड़   
देख अपनी जिन्दगी में
फिर एक नयी सुबह

सामने समय खड़ा है
हो सके तो पकड़   

कशमकश में तू न रह
कल पर कुछ न छोड़
कूद वादियों में कर्म की
पाल न आराम का मोह

सामने समय खड़ा है
हो सके तो पकड़   

भीड़ का हिस्सा न बन
रास्ते निर्माण कर
हवाओं को तू मोड़ दे
मंजिल को अपने बस में कर

सामने समय खड़ा है
हो सके तो पकड़   

किस्मत के सहारे न रह
किस्मत को मुटठी में कर
पंख फैला उड़ गगन में
रास्ते विस्तार कर

सामने समय खड़ा है
हो सके तो पकड़   

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