लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 7 September 2015

जिन्दगी की किताब को

जिन्दगी की किताब को आदर्शों की पूँजी

बनाकर देखो

दो पत्र ही जियो , मौत से दोस्ती कर के

देखो

जिन्दगी को संस्कारों की धरोहर से

सजाकर देखो

दो पत्र ही जियो, संस्कृति को जीवन का

आधार बनाकर देखो

जिन्दगी को औरों पर न्योछावर करके

देखो

दो पत्र ही जियो, औरों को अपना बनाकर

देखो

जिन्दगी को स्वाभिमान की पूँजी बनाकर

देखो

दो पत्र ही जियो, सत्य को जीवन का मर्म

बनाकर देखो

जिन्दगी की कमान ,नए सिरे से खींचकर

देखो
दो पत्र ही जियो, खुद से मुहब्बत करके

देखो
जिन्दगी न रुकने का नाम है, न हारने

का नाम

दो पत्र ही जियो , जिन्दगी को संवारकर

देखो

जीवन , इतिहास और अंतर्विरोधों का है

कोलाज

दो पत्र ही जियो, स्वयं की आत्मकथा

लिखकर देखो

जिन्दगी प्रेरणादायी जीवन के प्रतिबिम्ब

का है नाम

दो पत्न है जियो , प्रेरणादायी जीवनी

पढ़कर देखो

जिन्दगी बदलती जीवन धरा का है नाम

दो पत्र ही जियो , अपने पंख तल्लाश कर

देखो

जिन्दगी सतत परिवर्तन का है नाम

दो पत्र ही जियो , आदर्शों से बंधकर देखो

जिन्दगी प्रतिकूल परिस्थिति और इढ़

अच्छा शक्ति का है नाम

दो पत्र ही जियो , मौत से लड़कर देखो

जिन्दगी आत्मविश्वास और सफलता का

है नाम

दो पत्र ही जियो, नए आयाम स्थापित

करके देखो

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