लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 28 December 2014

कंचन कर दो काया मेरी , हे नटनागर हे गिरधारी


कंचन कर दो काया मेरी , हे नटनागर हे गिरधारी
 

कंचन कर दो काया मेरी , हे नटनागर हे गिरधारी

चरण कमल में ले लो मुझको , पावन हो फुलवारी
 

नंदनंदन मुझे चरण में ले लो , हो जाऊं बलिहारी
 
निर्धन पर हो दया प्रभु तेरी , दीनन के हितकारी
 

अहंकार से मुझे बचाना . रहूँ मैं चरण तुम्हारी
 
चन्दा सा तुम मुझे पावन कर दो , मैं तुम पर बलिहारी
 

मातपिता को शीश नवायें , ऎसी हो नियति हमारी
 
धर्म मार्ग पर बढ़ता जाऊं , कृपा करो गिरिधारी


सत्कर्म राह दिखलाओ कान्हा , कृपा करो बनवारी
 
सरिता सा मुझे पावन कर दो , हे दीनन हितकारी
 

माया मोह से मुक्त करो प्रभु , हे प्रभु कृष्ण मुरारी
 
तेरी महिमा के गुण गाऊँ , हे नटनागर हे गिरिधारी
 

तेरा रूप मनोहर कान्हा , हे ग्वालन हितकारी
 
वंशी की धुन सभी को भाये , हे मनमोहन हे गिरिधारी
 

भक्ति मार्ग पर ले लो मुझको , तुम पर मैं बलिहारी
 
जीवन पावन कर दो मेरा , हे प्रभु कृष्ण मुरारी
 

मोक्ष मार्ग पर लाओ मुझको. मैं तुम पर बलिहारी
 
कंचन कर दो काया मेरी , हे नटनागर हे गिरधारी


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