लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 24 December 2014

चलो चलें वहां जहां मिले ख़ुशी


चलो चलें वहां जहां मिले ख़ुशी

 

चलो चलें वहां जहां मिले ख़ुशी
 
चलो चलें वहां जहां पले ख़ुशी
 

चलो चलें वहां जहां मिले शांति
 
चलो चलें वहां जहां पले शांति
 

चलो चलें वहां जहां चन्दा का बसेरा हो
 
चलो चलें वहां जहां सरिता का किनारा हो
 

चलो चलें वहां जहां खुदा मिले
 
चलो चलें वहां जहां खुदा बसे
 

चलो चलें वहां जहां माँ का आँचल मिले
 
चलो चलें वहां जहां बचपन खिले
 

चलो चलें वहां जहां सुर की गंगा बहे
 
चलो चलें वहां जहां संगीत की सरिता बहे
 

चलो चलें वहां जहां इंसानियत का डेरा हो

 
चलो चलें वहां जहां मानवता का फेरा हो
 

चलो चलें वहां जहां पलती हो ममता
 
चलो चलें वहां जहां हो कोई विषमता
 

चलो चलें वहां जहां आदर्शों का डेरा हो
 
चलो चलें वहां जहां संस्कारों का डेरा हो
 

चलो चलें वहां जहां बचपन पल्लवित होता हो
 
चलो चलें वहां जहां माँ के आँचल का डेरा हो
 

चलो चलें वहां जहां लोरियों का स्वर सुनाई देता हो
 
चलो चलें वहां जहां पंक्षियों का डेरा हो
 

चलो चलें वहां जहां जीवन को देख जीवन मुस्कराता हो
 
चलो चलें वहां जहां जीवन की रागिनी का डेरा हो
 

चलो चलें वहां जहां मिले ख़ुशी
 
चलो चलें वहां जहां पले ख़ुशी


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