लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |
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Friday, 13 January 2023

वृद्धाश्रम – कहानी

 वृद्धाश्रम – कहानी

चंदेल जी के परिवार में दो बेटे मनोज और दिनेश के अलावा बेटी प्रिया भी थी l घर में चंदेल जी की पत्नी और माता सावित्री देवी भी रहती थीं l पिता को गुजरे वर्षों बीत गए थे l
चंदेल जी काफी समझदार व्यक्ति थे l घर में खुशी का माहौल बना रहता था l बच्चे भी दादी को खुश रखते थे l पर यह खुशी ज्यादा दिन तक न रह सकी l हुआ यूँ कि चंदेल जी के परिवार में दूर की बुआ घूमने आयीं l कुछ दिन रहीं और चली गईं l पड़ोस की मिश्रा जी एवं यादव जी की पत्नी भी कभी – कभी आ जाती और दादी से बातें करके चली जाती l किसी रिश्तेदार का घर आना अर्थात् भगवान का घर आना माना जाता है किन्तु जब ये मेहमान घर में फूट का बीज बो जाते हैं तब मन को कष्ट होता है | ऐसा ही चंदेल जी की बुआ ने किया और उनकी पड़ोसन ने | आइये आगे क्या हुआ देखते हैं इस कहानी में |
दो चार दिन बाद दादी के व्यवहार में परिवर्तन होना शुरू हो गया l अब दादी सास – बहू के टी वी सीरियल देखने की जिद करने लगी l बच्चों और दादी में कई बार तू – तू मैं – मैं होनी शुरू होने लगी l मामला और भी गंभीर होने लगा जब दादी अपनी बहु प्रिया पर तीखे प्रहार करने लगी l सभी दादी के इस व्यवहार से खुश नहीं थे l पर दादी के सिर पर तो मानो चंडी सवार हो गयी थी l अब दादी पड़ोसियों के घर भी जाने लगी और अपने परिवार की बुराईयां करने लगी l चंदेल जी का परिवार यह सब सहन करने की स्थिति में नहीं था l
चंदेल जी ने भी पूरी कोशिश की कि किसी तरह माँ के व्यवहार में पहले जैसा निखार आ जाये किन्तु वे भी असफल रहे l चंदेल जी ने अपनी माँ को कुछ दिन के लिए अपने छोटे भाई के पास भेज दिया ताकि कुछ बदलाव आ जाये l किन्तु दादी का यही व्यवहार वहाँ भी छोटे भाई और उसकी पत्नी के साथ भी बना रहा l सभी सोच में पड़ गए कि आखिर दादी ऐसा क्यों कर रही हैं l कुछ दिन बाद दादी वापस आ गयी l पर स्थिति वही बनी रही l
थक हारकर चंदेल जी ने एक निर्णय लिया और अपनी माँ को शहर के ही एक वृद्धाश्रम में छोड़ आए l अब दादी की हालत ख़राब होने लगी | पर मन मसोस कर वे आश्रम में रहने लगीं और घर के लोगों की सभी से चुगली करने लगीं | पर उनकी बातों का किसी पर कोई असर नहीं होता था l वे सब सुनते और मुस्कुरा देते l एक दिन आश्रम में कोई विशेष कार्यक्रम था l जोर शोर से तैयारियाँ हो रही थीं l सभी आज के कार्यक्रम के मेहमान को देखने के लिए उत्सुक थे l कार्यक्रम शुरू हुआ तो मेहमान की कुर्सी पर चंदेल जी विराजमान थे l उन्हैं देखते ही उनकी माँ जोर – जोर से चिल्लाने लगी l लोगों ने किसी तरह उन्हैं चुप कराया l
आश्रम के प्रबंधक महोदय ने चंदेल जी का स्वागत किया और इस आश्रम की स्थापना के लिए चंदेल जी को सम्मानित किया l अगले दिन चंदेल जी के बारे में किसी ने उनकी माँ को बताया कि आपके बेटे ने ही इस आश्रम की स्थापना की थी ताकि घर से बेघर हुए माता – पिता को इस आश्रम में जगह मिले और वे अपना जीवन आराम से गुजार सकें | एक और अच्छी बात ये है कि जिन बच्चों के माता – पिता ने अपने बच्चों के साथ बुरा बर्ताव किया उन्हें भी वे अपनी कोशिशों से उनके घर वापस भेज देते हैं ताकि उनके घर में पहले जैसी खुशियाँ वापस लौट सकें | अब चंदेल जी की माँ को अपने किये पर पछतावा होने लगा और उन्होंने भी अपने बर्ताव में परिवर्तन लाने शुरू कर दिए और आश्रम के अधिकारी से अपने घर के सभी सदस्यों से बात कराने को कहा | अधिकारी महोदय ने उनकी बात सभी से करवायी | दादी सभी से माफ़ी मांग रही थी | अपनी बहु से , बेटे से | सभी एक साथ उनको वापस घर ले जाने के लिए थोड़ी देर बाद ही वृद्धाश्रम आ पहुंचे |
चंदेल जी की माँ अपने आपको अपने परिवार के बीच पाकर बहुत खुश थी और घर के सभी लोग भी |

ढक्कन – कहानी

 ढक्कन – कहानी

मोहित अपने परिवार के साथ झुग्गी – झोपड़ी वाले इलाके में रहता था | माता – पिता दोनों दैनिक मजदूरी किया करते थे | घर में एक बहन भी थी जिया | जिया और मोहित की माँ आसपास के बड़े घर के लोगों के यहाँ झाड़ू – पोछे का काम करती थीं | मोहित के पिता पास ही एक फैक्ट्री में

काम किया करते थे | मोहित के पिता को शराब पीने का शौक था सो वे घर में किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद नहीं किया करते थे | घर का खर्च किसी तरह से चल रहा था | घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद भी जिया के ब्याह को लेकर घर में सभी चिंचित थे |

घर का माहौल ठीक न होने की वजह से भी मोहित पढ़ाई नहीं कर सका और दोस्तों के साथ आवारागर्दी में समय बिताने लगा | अपना खर्च चलाने के लिए वह दोस्तों के साथ कभी किसी का पर्स चुराने लगा तो कभी रेलवे स्टेशन पर किसी का पॉकेट मारने लगा | यहाँ तक कि वह महिलाओं के गले से सोने की चैन की झपटमारी भी करने लगा | कई बार वह जेल भी हो आया | घर वाले भी कोशिश कर चुके पर मोहित पर इसका कोई असर नहीं होता था | घर वालों ने मोहित को कई बार समझाया कि किसी दूकान पर काम कर ले या सब्जी का ठेला ही खोल ले | पर उसे तो रातों – रात अमीर बनना था | सो घर वालों की बातों को अनसुना कर देता |

धीरे – धीरे मोहित की आदतें बिगड़ने लगीं | वह पुलिस को बेवकूफ बनाने की कोशिश करता किन्तु उसकी ज्यादातर घटनाएँ सी सी टी वी कैमरे में रिकॉर्ड हो जातीं जिसके कारण वह कई बार पुलिस के चंगुल में फंस गया | छोटी – छोटी हरकतों के कारण उसे सजा भी छोटी मिलती इसलिए उस पर इनका कम असर होता | मोहित और उसके दोस्त कोई नया तरीका खोजने लगे ताकि काम भी हो जाए और घटना कहीं रिकॉर्ड भी न हो और जेल जाने से बच जाएँ | उनके दिमाग में एक विचार आया कि क्यों न शहर के बाहर की सड़कों पर सीवरेज पर लगे ढक्कनों को चुराया जाए | सो वे सभी इस काम पर लग गए | इस काम से उन्हें अच्छी रकम हाथ लगने लगी | जो रकम मिलती सब बराबर – बराबर बाँट लेते और अगली रात फिर वही ढक्कन को चुराने का खेल शुरू |

एक दिन सुबह – सुबह मोहित के घर पर उनके पडोसी जो मोहित के पिता के साथ फैक्ट्री में काम करते थे ने आकर बताया कि मोहित के पिता फैक्ट्री से लौटते वक़्त रात को सीवरेज टैंक में गिर गए और उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया है आप लोग जाकर देख लो | उनकी हालत गंभीर है | मोहित . उसकी माँ और बहन को पता चला तो वे अस्पताल भागे पर वहां जाकर पता चला कि मोहित के पिता की मृत्यु हो गयी है | यह सुनते ही मोहित को अपने आप से नफरत होने लगी कि जिस सीवरेज टैंक में गिरकर उसके पिता की मृत्यु हुई उसका ढक्कन उसने ही एक रात पहले चुराकर बेच दिया था | मोहित को एहसास ही नहीं था कि उस टैंक में गिरकर किसी की मृत्यु भी हो सकती है |

मोहित ने ये बात किसी को नहीं बतायी पर उसने मन ही मन निश्चय किया कि आज के बाद मैं ऐसे कोई भी गंदे काम नहीं करूंगा और मेहनत करके ही दो वक़्त की रोटी जुटाऊँगा | मोहित की मेहनत रंग लायी और उसने अपनी मेहनत की दम पर अपनी बहन की शादी भी की और अपनी माँ को भी लोगों के घर काम करने से मना किया | वे सभी एक खुशहाल जिन्दगी व्यतीत करने लगे |