विचार
जब अनैतिक रास्ते दैनिक जीवन का हिस्सा होने लगें तो समझ लेना चाहिए कि आप रावण, कंस या फिर कहें कि आप दुर्योधन बनने की ओर अग्रसर हो रहे हैं l
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
मेरी रचनाएं मेरी माताजी श्रीमती कांता देवी एवं पिताजी श्री किशन चंद गुप्ता जी को समर्पित
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जब अनैतिक रास्ते दैनिक जीवन का हिस्सा होने लगें तो समझ लेना चाहिए कि आप रावण, कंस या फिर कहें कि आप दुर्योधन बनने की ओर अग्रसर हो रहे हैं l
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
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तुम्हारे द्वारा किए गए सत्कर्म ही तुम्हारा धर्म है, जिस दिन इस बात का तुम्हें बोध हो जाएगा उस दिन मानव धर्म तुम्हारे लिए सर्वोपरि हो जाएगा l सारे द्वेष मिट जाएंगे और तुम खुद को उस परमात्मा के समीप पाओगे l
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
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तुम्हारे द्वारा किए गए सत्कर्म ही तुम्हारा वास्तविक धर्म है इस बात का जिस दिन तुम्हें बोध हो जाएगा उस दिन मानव धर्म तुम्हारे लिए सर्वोपरि हो जाएगा l तुम्हारे सारे क्लेश समाप्त हो जाएंगे और तुम खुद को उस परमात्मा के बहुत समीप पाओगे l
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
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जब तुम खुद से ही रूठ जाओ तो किसी रूठे को मनाने की कोशिश करना I यदि वो मान जाए तो समझ लेना तुम्हारी जिन्दगी दूसरों की अमानत हो गयी है I
अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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जब भी आपके प्रयासों को सकारात्मक ऊर्जा का सानिध्य प्राप्त होता है तब एक नयी इबारत का सृजन होता है l
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
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जब भी आप निराशा के दौर से गुजर रहे होते हैं तब आपकी मंजिल भी आपसे कोसों दूर कहीं गुमनामी के अंधेरे में पनाह ले लेती है l इसलिए आपको चाहिए कि आप सकारात्मक ऊर्जा के साथ – साथ खुद पर अपना विश्वास बनाए रखें l
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
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दिशाहीन मार्ग पर चलने से मंजिल की प्राप्ति की कल्पना करना व्यर्थ है ठीक उसी तरह जैसे कुमार्ग पर चलकर मोक्ष की प्राप्ति की कल्पना करना l
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम