लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Friday, 12 December 2014

गाँधी थे तुम सबसे प्यारे



गाँधी थे तुम 




सबसे प्यारे

 


गाँधी थे तुम सबसे प्यारे 
 
थे तुम पूज्य हमारे


जीवन जीने का मन्त्र दिया 
 
कर्म राह का तंत्र दिया


सत्य मार्ग के तुम थे प्रहरी 
 
अहिंसा का तुमने मन्त्र दिया


सत्याग्रह को अस्त्र बनाया 
 
मानव को बलिदान सिखाया


हे गाँधी तुम फिर से जागो 
 
सत्य राह सबको दिखलाओ


जीवन तेरा आदर्श बन गया 
 
पुण्यमूर्ति बन राह दिखा गया


अनुशासित था तेरा जीवन 
 
पुष्पित करता सबका जीवन


सहनशीलता तुमने सिखाई 
 
देश प्रेम की अलख जगाई


बापू तुम सबके बापू थे 
 
जीते जी और मरकर भी


तुमसे हममे संयम आया 
 
हमको भी सत्यमार्ग है भाया


हे गाँधी तुम फिर से आना 
 
वही आदर्श अपने संग लाना


पावन करना इस भूमि को 
 
एकता , शांति के दीप जलाना


तुमने त्याग का पाठ पढ़ाया 
 
राष्ट्र प्रेम में मरना सिखाया


आज जो गाँधी जन्म ले रहे 
 
वो सब गांधीगिरी कर रहे


साकार नहीं हुए तेरे सपने 
 
टूटे – टूटे , बिखरे – बिखरे


संघर्ष तेरा रह गया अधूरा 
 
मानव , मानव हुआ न पूरा


हे गाँधी तुम फिर से आओ 
 
भ्रष्टाचार से मुक्त कराओ


आधुनिकता की इस अंधी दौड़ से

हम सबको मुक्त कराओ


हे गाँधी तुम फिर से आओ 
 
हे गाँधी तुम फिर से आओ 
 
हे गाँधी तुम फिर से आओ


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