लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Saturday, 27 December 2014

मैं तेरी चाहत को अपनी चाहत समझ बैठा


मैं तेरी चाहत को अपनी चाहत समझ बैठा


मैं तेरी चाहत को अपनी चाहत समझ बैठा
 
तू कसी और की जागीर थी , खबर नहीं मुझको
 
तेरे एहसास से रोशन है जिन्दगी मेरी
 
तू किसी और की अमानत थी , खबर नहीं मुझको
 


भरे शहर लुट रही अस्मत
 
ऐसे भी चरित्र बसर कर रहे , खबर नहीं मुझको
 

मुझे तेरी बेबसी का ख्याल था जानम
 
हमने बुलाया भी नहीं , आप आये भी नहीं
 

जिन्दगी सितारों की तरह बदलती है रंग अपना
 
कभी पास तो कभी दूर होने का गुमां देती है
 

खिलाओ फूल , कभी खुशबू फैलाकर देखो
 
किसी बदनसीब का नसीब बनाकर देखो


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