लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |
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Friday, 30 August 2024

दो दिन की जिंदगानी रे बन्दे

 दो दिन की जिंदगानी रे बन्दे

क्यूँ करता अभिमान रे बन्दे

महल अटारी सब छूटेंगे
खाली हाथ है , जाना रे बन्दे

क्यूँ करता अभिमान रे बन्दे

क्या लाया था , इस जग में तू
क्या साथ ले जाएगा

भाग रहा भौतिक जग में तू
मोक्ष राह से भटक जाएगा रे बन्दे

क्यूँ करता अभिमान रे बन्दे

क्या है मेरा , क्या है तेरा
ये जग है , माया का फेरा

साँसों की माला कब टूटेगी
समझ नहीं आयेगा , तुझे रे बन्दे

क्यूँ करता अभिमान रे बन्दे

दीन दुखियों की परवाह कर तू
कुछ कर्म इंसानियत की राह कर तू

क्यूँ कर माया के पीछे दौड़े
चल आध्यात्म की राह रे बन्दे

क्यूँ करता अभिमान रे बन्दे

चिंतन में तुम , प्रभु को धारो
जीवन अपना धर्म राह में वारो

जीवन नैया तेरी डगमग डोले
क्यूँ करता मनमानी रे बन्दे

क्यूँ करता अभिमान रे बन्दे

अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”