लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Friday, 13 February 2015

फना हो जायेगी शख्सियत तेरी

फना हो जायेगी शख्सियत तेरी

फिरे जो उस खुदा की राह से 
फना हो जायेगी शख्सियत तेरी

तरक्की का कोई वाजिब सिला ढूंढो
नाउम्मीदी भी उम्मीद जगा देगी
फिरे जो उस खुदा की राह से 
फना हो जायेगी शख्सियत तेरी

काबिल होते हैं वही इस राहे दौर में
राहें पाक – साफ़ होती हैं जिनकी
फिरे जो उस खुदा की राह से 
फना हो जायेगी शख्सियत तेरी

किताबें जिन्दगी का आइना हो जाएँ
पढ़ो तो इन्हें बंदगी की तरह
फिरे जो उस खुदा की राह से 
फना हो जायेगी शख्सियत तेरी

ख्याल हो कि मुझे प्रयास करना है
किस्मत के सहारे जिन्दगी नहीं कटती
फिरे जो उस खुदा की राह से 
फना हो जायेगी शख्सियत तेरी

खुद को कुर्बान कर उस खुदा के लिए
वर्ना ख़ाक में मिल जायेगी शख्सियत तेरी
फिरे जो उस खुदा की राह से 
फना हो जायेगी शख्सियत तेरी

खामोश रह कर भला नहीं होगा
दो बोल प्यार के बोल जरा
फिरे जो उस खुदा की राह से 
फना हो जायेगी शख्सियत तेरी

ख़्वाब पूरे हुए हैं उसके
जो नेक ख्यालों से बढ़ा
फिरे जो उस खुदा की राह से 
फना हो जायेगी शख्सियत तेरी


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