लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 25 February 2015

अजीब कशमकश के दौर से गुजर रहे हैं हम - मुक्तक

१.


अजीब कशमकश के दौर से गुजर रहे हैं हम

चाहकर भी किसी की अँधेरी रात में रोशनी नहीं कर रहे हैं हम

अफसाना हो गयी हैं उस दौर की बीती बातें

आजा किसी गिरते को सहारा नहीं दे रहे है हम

२.


अरमां तो थे किसी की आँखों के नूर हो जायें 

पर  किसी के होठों पर मुस्कान बिखेर नहीं रहे हैं हम

अपनी ही मुसीबतों का रोना पीटते हैं हम

किसी रोते को हंसाते नहीं हैं हम



3.


तेरी रहमत तेरे करम की आरज़ू हमको

तेरे रहम तेरी जन्नत की आरज़ू हमको

आशिक हो जाएँ तेरे , इबादत में तेरी

तेरे दीदार तेरे आसरे की आरज़ू हमको 



4.


ये इत्तफाक है या मेरी किस्मत ऐ मेरे खुदा

तेरी इबादत के नूर से रोशन आशियां मेरा

ईमान मेरा ,तेरे करम से तेरी अमानत हो गया

मेरी खुशनसीबी है कि मैं तुझ पर कुर्बान हो गया




No comments:

Post a Comment