लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 4 February 2015

हर एक शै में तेरा अश्क नज़र आता है

हर एक शै में तेरा अश्क नज़र आता है
जहां भी देखूं तेरा एहसास नज़र आता है
एक तेरे करम से जी रहे हैं सभी
हर एक के दिल में तू ही तू नज़र आता है

बारिश की बूंदों में तेरा अश्क दिखे
गुलशने बहार में भी तेरा अश्क नज़र आता है
भंवरों की गुंजन में इबादते संगीत नज़र आता है
माँ की लोरियों में भी तेरा एहसास नजारा आता है

नासमझ हैं सभी ये पता है मुझको
हर एक नसीहत में तेरा करम नज़र आता है
परवरिश करता है तू दिल का टुकड़ा समझ अपना
हर एक शख्स में फ़रिश्ता नज़र आता है 


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