लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Friday, 6 February 2015

मुझे वो गुजरा ज़माना याद आया

मुझे वो गुजरा ज़माना याद आया

मुझे वो गुजरा ज़माना याद आया
वो तेरी जुल्फों का सिराना याद आया

कि मिलते थे हम छुप - छुपकर
वो तेरा मुस्कुराना याद आया
गज़ब की अदाओं से नवाज़ा था खुदा ने तुझको
वो तेरा गली से गुजरना याद आया

फुर्सत के पलों में बनाया था खुदा ने तुझको
वो धीरे से तेरे आँचल का सरकना याद आया

हुस्न के चर्चे थे शहर में तेरे जानम
वो छुप – छुपकर मिलना याद आया

तेरे दीदार को जब तरसा करते थे हम
वो छत पर अँधेरे में मिलना याद आया

गुजरा करते थे तेरी गली में जब भी
वो तेरा मुंडेर पर जुल्फों का संवारना याद आया

सोचा न था कभी हमारा होगा मिलन
मुहब्बत के खुदा को हम पर रहम आया

मुझे वो गुजरा ज़माना याद आया
वो तेरी जुल्फों का सिराना याद आया


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