लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Saturday, 17 January 2015

हमारी सादगी उन्हें रास न आई

हमारी सादगी उन्हें रास न आई
हमारा प्यार उन्हें रास न आया
बीत जो बात गयी क्या कहें
उन्हें हमारा इंतज़ार रास न आया

उन्हें हमसे शिकायत न रहे , हमें उनसे शिकायत न रहे
चलो दिल से दिल मिलायें कोई गुंजाइश न रहे

उनका हसरते दीदार ख्वाहिश है मेरी
उनकी बाहों में बीते रात , ये चाहत है मेरी
यूं तो आते हैं रोज , ख़्वाबों में मेरे
मिल बैठ जानें एक दूजे का हाल , ये तमन्ना है मेरी

तकलीफ हुई दिल के टूटने पर मुझको
आंखें नाम हुईं उनके रूठने पर मुझको
नफरत भरी निगाहों से नहीं देखा मैंने कभी उनको
उनकी बेवफाई पर दिल पर चोट लगी मुझको

चाहतों के समंदर से हम अनजान हैं क्यों
प्यार के एहसास से हम अनजान हैं क्यों
अजनबियों सी जिन्दगी जे रहे हैं हम

मकसदे इंसानियत ये हम अनजान हैं क्यों 

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