लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 4 January 2015

नव वर्ष की मंगल गाथा हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो
सामाजिकता में नैतिकता हो , विचारों में पवित्रता हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो

कर्मों में सात्विकता हो , संस्कृति में गतिशीलता हो
जीवन में पुण्य प्रकाश हो , चहुँ ओर धार्मिकता हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो

विलक्षण सभी चरित्र हों , दिलों में सहृदयता हो
आधुनिकता का प्रकास्ध क्षीण हो , विचारों में सात्विकता हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो

धर्म की विजय हो , अधर्म का नाश हो
मान सम्मान और यश हो , स्वयं पर नियंत्रण हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो

देवालयों में शंखनाद हो , गिरिजाघरों में घंटनाद हो
गुरुद्वारों में सतनाम गूंजे , मस्जिदों में अज़ान हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो

कर्तव्यनिष्ठ हर एक चरित्र हो , आत्म सम्मान सर्वोपरि हो
नारियां वीरांगना हों , युवा देश का आइना हों

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो

पराक्रम का भाव हो , पराकाष्ठा का भाव हो
प्रेरणा का भाव हो , प्रगति का भाव हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो

संकल्प मार्ग का जोर हो , आदर्श मार्ग का शोर हो
सुशिक्षित हर चरित्र हो , संयम का भोर हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो

हृदयता में कोमलता हो , जीवन में अनुशासन हो
उन्नति का भाव हो , एक दूसरे का अभिवादन हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो

चेहरों पर मुस्कान हो , चेहरों पर कांति हो
मन में संतोष हो , मन में शांति हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो

एक दूसरे का अभिनन्दन हो , एक दूसरे का सम्मान हो
सभी का अत्कार हो , सभी का सम्मान हो

नव वर्ष की मंगल गाथा हो , चहुँ और संस्कारों का मेला हो


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