लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Saturday, 3 January 2015

गंजों का दुनिया में अपना ही नाम है


 
गंजों का दुनिया में अपना ही नाम है
 

गंजों का दुनिया में अपना ही नाम है
 
कंघी की जरूरत , तेल का कोई काम है

 

चाँद इनकी चमके , दुनिया में बेमिसाल है
 
ढूंढते हकीम ये , बालों की चाह में

 

कहते हैं गंजों के पास ,होता बहुत माल है
 
पर बालों के मामले में होती किस्मत कंगाल है

 

गंजों की बीवियों को पति के बालों होने का रहता मलाल है
 
गंजों की बीवियों का भी गंजों सा हाल है

 

सोचते थे कभी हरियाली थी इनके सिर पर
 
कंघी दौड़ती थी इनके सिर पर सर-सर

 

लड़कियां मरती थीं इनके बालों की स्टाइल को देखकर
 
रौब मारते थे ये अपने बालों को देखकर

 

पर आज रो रहे हैं ये एकएक बाल के लिए
 
कोसते हैं खुद को इस चिकनी चाँद के लिए

 

डॉक्टर और हकीम के चक्कर मारे बहुतबहुत
 
जेब से माल भी निकाले बहुतबहुत

 

पर आज भी बालों की फसल रोशन हुई नहीं
 
इस मुरझाये चहरे पर मुस्कराहट फैली नहीं

 

अब आप ही बताओ मैं कहाँ जाऊं
 
इस बालों से विहीन चाँद को कैसे मैं छुपाऊँ
 

हाय ये चाँद मुझको कितना रुलाएगी
 
मेरी बीवी भी मुझे अपने पास बिठाएगी
 



ख़ुशी है कि बालों वाले मुझे देख इठलाते
 
और अपनी उपलब्धि पर मंदमंद मुस्काते

 

दूसरों को देखदेख खुश हो रहा हूँ मैं
 
अपने बालों की और देख ग़मगीन हो रहा हूँ मैं

 

दुआ करो अगले जन्म , ये हरियाली मुझे मिले
 
अगले जन्म में सुन्दर सी बीवी मुझे मिले

 

गंजों का दुनिया में अपना ही नाम है
 
कंघी की जरूरत , तेल का कोई काम है

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