लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 14 December 2015

जन्नत की आरज़ू नहीं मुझको

जन्नत की आर जू नहीं मुझको

जन्नत की आरजू नहीं मुझको
अपना गुलाम बना के रख
जूनून की हद तक ही सही
अपना शागिर्ट बना के रख

डबादत की जंजीरों में
जकड़कर रख मुझको ऐ मौला
ठिकाना मेरा, दर हो तेरा
इस नाचीज को अपना बना के रख

नादानी में भी मुझसे
हो न गुनाह कोई
निगेहबान हो तू मेरा
मुझको अपनी पनाह मेँ रख

मुहब्बत हो मुझको
सभी बन्दों से तेरे
आँखों का तेरी नूर हो सकूं मौला
रहम कर , अपनी नवाजिश मैं रख

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