बेदर्द जमाने ने मुझे
ग़मों की सौगात दी है
एक हम थे जिन्होंने
उफ़ भी न किया
कुदरत के नज़ारे
हमारी जिन्दगी का हिस्सा हो जाते
काश पर्यावरण के प्रति
हम भाईचारा दिखाते
मेरी कलम ने देखो
क्या कमाल किया
वो वाहवाही करते रहे
और मैं हैरान हुआ
मेरी रचनाएं मेरी माताजी श्रीमती कांता देवी एवं पिताजी श्री किशन चंद गुप्ता जी को समर्पित
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