मेरे सपनों का भारत
मेरे सपनों का भारत , काश !
तीन सौ वर्ष पूर्व की गंगा सा
पावन, निर्मल होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
आज भी सोने की चिड़िया कहलाता
मेरे सपनों का भारत , काश !
आज भी रामराज्य की संकल्पना को
साकार करता
मेरे सपनों का भारत , काश !
भाईचारे के पावन रिश्ते से परिपूर्ण होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
पुनः संत समाज के मानवतावादी व
धार्मिकतावादी विचारों से ओतप्रोत होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
राजभाषा हिंदी को विश्व पटल पर
सम्मानित करता
मेरे सपनों का भारत , काश !
राजनीतिक रोटियां सेंकने वालों का
गढ़ न होकर
राष्ट्र को समर्पित चरित्रों का
आशियाँ हो जाता
मेरे सपनों का भारत , काश !
भ्रष्टाचार से मुक्त एक
मानवतावादी विचार से संपन्न राष्ट्र होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
आधुनिक विचारों से प्रभावित न
होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
संस्कृति और संस्कारों की गंगा
बहाता
मेरे सपनों का भारत , काश !
आध्यात्म और जीवन जीने की कला से
परिपूर्ण एक संगम होता
भौतिकतावाद से ऊपर उठ आध्यात्मवाद
का केंद्र हो पाता
मेरे सपनों का भारत , काश !
ऋषियों – मुनियों के सद विचारों
से पुष्पित होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
स्वयं को क्षेत्रीयतावाद ,
धार्मिकता , सम्प्रदायवाद से ऊपर उठ
प्रजातंत्र को जीवंत रख पाता
मेरे सपनों का भारत , काश !
काले धन के चोरों की शरण स्थली न
होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
कवियों के रक्त से लिखी
मानवतावादी विचारों से परिपूर्ण
कविताओं से पुष्पित होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
गाँधी, विवेकानंद , टैगोर के
विचारों को जीवंत रख पाता
मेरे सपनों का भारत , काश !
आदर्शों , संस्कारों को संजोकर रख
पाता
मेरे सपनों का भारत , काश !
आधुनिक दूषित विचारों से स्वयं को
बंधन मुक्त रख पाता
मेरे सपनों का भारत , काश !
देवालयों , मंदिरों की घंटियों की
ध्वनि से पावन होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
चर्चों , मस्जिदों , गुरद्वारों
के पावन विचारों की धरोहर होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
कोई भी देश में कुपोषण का शिकार न
होता
कोई भी भूख से न मरता
मेरे सपनों का भारत , काश !
जहां बालपन बाल मजदूरी को बाध्य न
होता
काश वह शिक्षा उपवन की रौनक होता
मेरे सपनों का भारत , काश !
जहां की मिटटी की भीनी – भीनी खुशबू
जीवन की बगिया को पुष्पित करती
शिक्षा के मंदिर देवालयों से पूजे
जाते
जहां शिक्षक वृन्द देवतुल्य हो
जाते
मेरे सपनों का भारत , काश !
जहां किसान को अन्नदाता समझा जाता
मेरे सपनों का भारत , काश !
काश पावन जल से परिपूर्ण कालिंदी
को सिंचित कर पाता
जहां गंगा, निर्मल- पावन होकर कल –
कल कर बहती , जीवन प्रदान करती
मेरे सपनों का भारत , काश !
जहां बालपन अठखेलियाँ करता
परम्परागत साधनों से बालपन को
सींचता , पुष्पित करता
मेरे सपनों का भारत , काश !
जहां भ्रष्ट आचरण को तनिक भी
स्थान न मिलता ,
सद विचारों की गंगा बहती
मेरे सपनों का भारत , काश !
जहां घर – घर में राम के आदर्श
पल्लवित व संस्कारित होते
गौतम बुद्ध , विवेकानंद, नानक,
रामकृष्ण के धार्मिक
विचारों को शिक्षण संस्थाओं का
संरक्षण प्राप्त होता और
वे इन विचारों के सर्वश्रेष्ठ
प्रचारक होते
मेरे सपनों का भारत , काश !
जहां घर , मकान न होकर मंदिर हो
जाते
रिश्तों की मर्यादा , समाज का पूँजी
होती
मेरे सपनों का भारत , काश !
सबकी आँखों का नूर होता
काश ! सबके दिलों पर राज़ करता
काश ! भारत, भरत के आदर्शों की
पूँजी सहेज पाता
मेरे सपनों का भारत , काश !
मेरे सपनों का भारत , काश !
मेरे सपनों का भारत , काश !
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