लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Thursday, 6 February 2020

रिश्तों की बेकद्री ने


रिश्तों की बेकद्री ने


रिश्तों की बेकद्री ने , किस मोड़ पर ला खड़ा किया है हमें

बदलते मौसम की तरह , रिश्ते बदलने लगे हैं लोग


अविश्वास और आकाक्षाओं की परत ने दिलों में बना ली है जगह

अपनों को भो अपना कहने में अब ,डरने लगे हैं लोग


एक दौर था जब रिश्तों को निभाने का दिलों में होता था जूनून

एक ये दौर है जहां खुद को ही संभालने में हैं मशगूल


क्यूं कर ताक पर रख दी है इंसानियत हमने

चाहकर भी दूसरों के गम को अपना कहने से डरने लगे हैं लोग


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