लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 2 February 2020

तेरी यादों की वो परछाइयां


तेरी यादों की वो परछाइयां

तेरी यादों की वो परछाइयां, और ये तनहाइयां
भीगी  - भीगी वो सुबह और शाम की रानाइयां

तेरी यादों का वो समंदर और ये तनहाइयां
 दिल को  दिल से राह थी, खुशनुमा हर शाम थी

तेरा आना और जाना, और तेरा वो मुस्कुराना
आशिक़ी परवान थी , खुशनुमा हर शाम थी

छुपके मिलना और मिलाना और तेरा रूठ जाना
मेरा तुझको मनाना और सीने से लग जाना

तन्हाइयों में ढूंढता फिरता हूँ आज   
तेरा तो मैं अपने करीब करता हूँ एहसास

तेरी हर एक बात को मैंने अपनी अमानत कर लिया
तेरे हर एक एहसास को मैंने अपनी यादों में पिरो लिया

तेरी हर एक चाहत को मैंने अपनी चाहत बना लिया
तेरी हर एक याद को मैंने अपनी अमानत कर लिया

तू आएगी एक दिन मेरे ख़्वाबों की गली में
अपने हर एक ख़्वाब को मैंने अपनी अमानत कर लिया



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