लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 27 July 2021

तू मेरा मालिक , मालिक है मेरा

 

तू मेरा मालिक , मालिक है मेरा

 

तू मेरा मालिक , मालिक है मेरा

तुझसे ही रोशन , मेरी जिन्दगी है |

 

हुआ मैं रोशन , करम से तेरे

तुझसे ही रोशन , मेरी जिन्दगी है |

 

अपना समझना , सदा ही मुझको

पीर मेरी , फ़ना हो रही है |

 

तेरे दीदार की, आरज़ू है मुझको

हैं आसपास महसूस करता हूँ तुझको |

 

तेरे करम का , साया है मुझ पर

तुझसे ही रोशन , मेरी जिन्दगी है |

 

गीत बनकर रोशन हो जाऊं मैं

ग़ज़ल बनकर निखर जाऊं मैं

 

ज़ज्बा हो इंसानियत का मुझमे

पीर सबके दिलों की मिटाऊँ मैं

 

तेरे करम से रोशन हुई कलम मेरी

तेरी इबादत को अपना मकसद बना लूं मैं

 

तेरा शागिर्द हूँ , नाज़ है मुझको तुझ पर

तेरे दर का चराग कर लूं खुद को

 

मेरे मुकद्दर पर , हो तेरी इनायत और करम

तेरी इबादत में खुद को फ़ना कर लूं मैं |

 

तू मेरा मालिक , मालिक है मेरा

तुझसे ही रोशन , मेरी जिन्दगी है |

 

हुआ मैं रोशन , करम से तेरे

तुझसे ही रोशन , मेरी जिन्दगी है |

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