लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 14 July 2021

हिंदी साहित्य जगत में अनेक सितारे हैं

 हिंदी साहित्य जगत में अनेक सितारे हैं

 

 हिंदी साहित्य जगत में , अनेक सितारे हैं

कुछ टिमटिमाते तारे, कुछ सूर्य की तरह गरम अंगारे हैं

 

कुछ स्वयं को साहित्य जगत में , स्थापित कर पाते हैं

कुछ गुमनामी के , अँधेरे में खो जाते हैं

 

कुछ तो पुराने सतित्याकारों को ही , साहित्य जगत का आधार स्तम्भ मान बैठे हैं

नवीन उदीयमान साहित्यकारों को ,  पराया मान बैठे हैं

 

कुछ नहीं चाहते कि , नित नए कमल खिलें

कुछ नहीं चाहते कि , दूसरों की भी दाल गले

 

कुछ ऐसा समझते हैं कि केवल , उनकी रचनाएं ही गर्व का विषय हैं

दूसरों की रचनाओं को वे , गर्व का विषय कैसे कह दें

 

वे चाहते हैं कि लोग उनकी रचनाओं का आचमन कर , सकारात्मक टिप्पणी करें

पर शायद भूल जाते हैं कि दूसरों की उत्कृष्ट रचनाओं पर , वे भी ताली बजा सकते हैं

 

नये युग का निर्माण करना है तो , उदीयमान रचनाकारों को स्वीकारना ही होगा

उनके द्वारा स्थापित किये जा रहे , नित  - नए आयामों को अधिकार दिलाना ही होगा

 

एक स्वस्थ साहित्य जगत का निर्माण करना है

तो सभी को विश्व साहित्य मंच पर लाना ही होगा

 

कलम किसी की भी हो , विचार किसी के भी हों

उदीयमान रचनाकारों को भी , खुला आसमां दिलाना ही होगा

 

उदीयमान हिंदी साहित्यकारों को , उनका मुकाम दिलाना ही होगा

सबको गले लगाना होगा , सबके लिए ताली बजाना ही होगा

 

हिंदी को विश्व मंच पर स्थापित करना है

तो इस गीत को अपनी रचनाओं का हिस्सा बनाना ही होगा

 

आइये सब साथ बढ़ चलें , दूर स्वच्छ गगन की ओर

जहां सभी को सूर्य की तरह , चमकने का अधिकार हो

 

जहां आसमां , किसी से भेद नहीं करता

जहां सभी को पंख फैला , उड़ने का अवसर हो

 

जहां समा लेता है , उन्मुक्त गगन अपनी आगोश में

देता है पंख लगा अवसरों की , उड़ान भरने का हौसला

 

तो विलंब कैसा और किसका इंतज़ार

तो आओ चलो मिलकर चलें

 

हिंदी साहित्य जगत को शिखर पर विराजें

और स्थापित करें नित नए आयाम II

 

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