लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 6 July 2021

पीर दिलों की मिटा के

 पीर दिलों की मिटा के

 

पीर दिलों की मिटा के , रोशन किया ज़ज्बा – ए  - वतन

मादरे वतन पर मर मिटने का ज़ज्बा सिखा गए |

 

वतनफ़रोशी का ज़ज्बा थी , उनकी धरोहर

वो राग जिन्दगी का सुनाकर चले गए |

 

कर गए रोशन अपने देश पर,  मर मिटने का ज़ज्बा

वो गीत बन के दिल में समाते चले गये |

 

अपने लहू से सींच गए , वतनपरस्ती का ज़ज्बा

मादरे वतन पर निसार होने की कला सिखा गए |

 

मिटा दिया नासूर गुलामी का , कर अपना सर्वस्व समर्पण

जो मर मिटे थे अपने , अपने देश की खातिर चले गए |

 

गुलामी की जंजीरों से , आजाद कर गए वतन को

माँ भारती के सच्चे सपूत होने का , सिला सिखा गए |


पीर दिलों की मिटा के , रोशन किया ज़ज्बा – ए  - वतन

मादरे वतन पर मर मिटने का ज़ज्बा सिखा गए |

 

वतनफ़रोशी का ज़ज्बा थी , उनकी धरोहर

वो राग जिन्दगी का सुनाकर चले गए | |


 

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