लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 2 February 2014

पर्वत पिघले हिलती धरती

पर्वत पिघले हिलती धरती

पर्वत पिघले हिलती धरती
अब तो कुछ समझो यारों

कहीं समंदर दोल रहा है
हमसे कुछ – कुछ बोल रहा है

अब तो कुछ समझो यारों

लगता टूटा – टूटा सा मानव

अब तो कुछ समझो यारों

धू – धू करती यह धरती
मरते प्राणी औए ये पंक्षी

पीने को पानी न मिलता

अब तो कुछ समझो यारों

मातृ प्रेम से किया किनारा
पल – पल बिकता है सारा

हाय – हाय कर देश पुकारे

अब तो कुछ समझो यारों

पल – पल जीता , पल – पल मरता
पल – पल गिरता , पल- पल उठता

उठ कर फिर गिरता मानव

अब तो कुछ समझो यारों

बिखरा – बिखरा हर – क्षण जीवन
जल्दी – जल्दी सरके जीवन

नव – शिशु कुछ कहता हमसे

अब तो कुछ समझो यारों

गली – गली अब काम पिपासा
मंदिरों से छूटा नाता

बियर बार सब डोल रहे हैं


अब तो कुछ समझो यारों 

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