लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 11 February 2014

मेरा विद्यालय

मेरा विद्यालय

मेरा विद्यालय मेरे शहर का
नूर हो गया

फूलकर मेरा सीना चौड़ा
भरपूर हो गया

मेरे विद्यालय की शान
निराली है

मेरे विद्यालय के बच्चों की
सूरत भोली भाली है

मेरे विद्यालय के बच्चों का
पढ़ाई में नहीं कोई सानी है

इन्हें पढ़ाई करते समय
आती याद नहीं नानी है

मेरे विद्यालय में हम
समय पर प्रार्थना में जाते हैं

करते हैं प्रभु को याद
और आशीर्वाद पाते हैं

मेरे विद्यालय में हम
पुस्तकालय में जाते हैं

किताबें , मेगज़ीन पढ़ते हैं
अपना ज्ञान बढाते हैं

मेरे विद्यालय के शिक्षकों की
बात ही निराली है
                         
शिक्षण में इनका नहीं कोई सानी है                                                                                             हरा – भरा और खुला मैदान यहाँ
  
फूल और पेड़ों की न्यारी छटा यहाँ                       

मन को हमारे प्रफुल्लित कर जाती है

बच्चों के मन में देश प्रेम
भावना जागते यहाँ

शिक्षक सभी गुरु रूप में
पूजे जाते हैं

मेरा विद्यालय मेरे शहर का
नूर हो गया

फूलकर मेरा सीना चौड़ा

भरपूर हो गया                                                                                                                                                                    

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