लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 5 February 2014

तेरी असीम कृपा

                तेरी असीम कृपा

तेरी असीम कृपा का
हो मुझ पर पारावार
जीवन तर जाए मेरा
तुझसे मुझको आस

नयन विव्हल तेरे दर्शन को
मैं तेरे चरणों का दास
पुण्य धरा पर जीवन देना
तुझसे मुझको आस

चिर परिचित तेरे नामों को
धार सकूं इस जीवन में
हो जाऊं परीक्षा पास
तुझसे मुझको आस

चिरविस्मरणीय हो याद तुम्हारी
नयनों में हो तेरा वास
हो जाऊं मैं जीवन पार
तुझसे मुझको आस

मोक्ष पताका फहराओ तुम
परम तत्व से मिलवा दो तुम
सत्य आत्मा कहलाऊँ मैं
तुझसे मुझको आस

पुण्य धरा के पापी पुतले सब
जीवन क्षीण न हो जाए हमारा
कर दो पुण्य विस्तार
तुझसे मुझको आस

समय चक्र में न उलझें हम
पाप चक्र से दूर रहें हम
बुझादों हमारी प्यास
तुझसे मुझको आस

पाना हो जीवन की नियति
जियें सत्य मानिंद
सत्य मार्गी जीवन कर दो
तुझसे मुझको आस

खिलूँ पुष्प बन इस धरती पर
आदर्शों की मूरत बन जाऊं
तेरी महिमा वरन करैं सब
सबको मुझको आस

पुण्य शील तेरी महिमा हो
खिलता हर पावन जीवन हो
मुझको भी तुम पुण्य बना दो
तुझसे मुझको आस

जीवन अंत न मिले निराशा
तेरे नां में बसती आशा
नां तेरा विस्तार करूँ मैं
तुझसे मुझको आस

मातु शारदे हंसवाहिनी
जीवन सफल करो तुम मेरा
विस्तार ज्ञान हो कलम से मेरी
ऐसा वर दो आज
तुझसे मुझको आस
तुझसे मुझको आस


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