मुक्तक
जब तेरी कोशिशें दूसरों की ख़ुशी का पर्याय होने लगें
जब तेरे प्रयास दूसरों के ग़मों में विराम लगाने लगें
जब तेरी कोशिशें किसी के सूने जीवन में खुशियाँ लाने लगें
तब समझना कि तुम सद्चरित्रता को प्राप्त हो गए हो |
मेरी रचनाएं मेरी माताजी श्रीमती कांता देवी एवं पिताजी श्री किशन चंद गुप्ता जी को समर्पित
मुक्तक
जब तेरी कोशिशें दूसरों की ख़ुशी का पर्याय होने लगें
जब तेरे प्रयास दूसरों के ग़मों में विराम लगाने लगें
जब तेरी कोशिशें किसी के सूने जीवन में खुशियाँ लाने लगें
तब समझना कि तुम सद्चरित्रता को प्राप्त हो गए हो |
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए
कुछ तुम हमारे , कुछ हम तुम्हारे खैरख्वाह हो जाएँ
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |
चंद रातें तुम करो, चंद रातें हम करें रोशन
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |
चंद पल एक दूसरे की आगोश में , जिन्दगी की खुशनुमा याद हो जाएँ
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |
चंद कदम मैं चलूँ , चंद कदम तुम चलो , मंजिल नसीब हो जाए
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |
चंद मुस्कान तुम बिखेरो, चंद मुस्कान हम , जिन्दगी खुशियों का समंदर हो जाए
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |
कुछ तुम मुझे मनाओ, कुछ मैं तुमको , जिन्दगी खुशियों का अम्बार हो जाए
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |
कुछ तुम हमारे , कुछ हम तुम्हारे खैरख्वाह हो जाएँ
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |
चंद रातें तुम करो, चंद रातें हम करें रोशन
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |
चलो ईद मनाएं मिलकर , होली के रंग सजाएं मिलकर
चलो ईद मनाएं मिलकर , होली के रंग सजाएं मिलकर
पीर दिलों की मिटाकर , दीपावली के दीये सजाएं मिलकर |
क्यूं कर हो जाएँ , हम कुटिल , अधर्मी राजनीति के शिकार
आओ इस वतन को , खूबसूरत आशियाँ बनाएं मिलकर |
चलो मनाएं क्रिसमस , प्रकाश पर्व मिलकर
धर्म के ठेकेदारों को आओ , सच का आइना दिखाएँ मिलकर |
वो करते हैं धर्म की राजनीति , एक अदद कुर्सी की खातिर
आओ चलो इस दुश्चारित्रों को कुर्सी से गिराएं मिलकर |
चलो ओणम , पोंगल , बिहू , लोहड़ी मनाएं मिलकर
संस्कृति और संस्कारों का एक कारवाँ रोशन करें मिलकर |
क्यूं कर इंसानियत शर्मशार हो रही पल – पल
चलो इंसानियत का ज़ज्बा , हर एक शख्स में जगाएं मिलकर |
मनाएं सभी त्यौहार , सभी धर्मों के एक साथ मिलकर
उत्सवों , त्योहारों का एक खूबसूरत कारवाँ सजाएं मिलकर |
क्यूं कर हमारी एकता और अखंडता पर हो कुटिल राजनीति की नज़र
चालू राजनीतिज्ञों को एकता का पाठ पढ़ाएं मिलकर |
चलो ईद मनाएं मिलकर , होली के रंग सजाएं मिलकर
पीर दिलों की मिटाकर , दीपावली के दीये सजाएं मिलकर |
क्यूं कर हो जाएँ , हम कुटिल , अधर्मी राजनीति के शिकार
आओ इस वतन को , खूबसूरत आशियाँ बनाएं मिलकर |
दीपक तले अंधेरा देखा हमने
दीपक तले अंधेरा देखा हमने
अपनों में पर परायापन देखा हमने
दिखावा करते थे वह अपनी पाक मोहब्बत का
मोहब्बत के आशियां को उजड़ते देखा हमने
अपनों के अपनेपन के बहुत मंजर देखे हमने
कभी गिराते, कभी तड़पाते अपने देखे हमने
मोहब्बत को जताने का उनका जज्बा था अजब
बेवफाई के बहुत से फसाने देखे हमने
वो कहते थे मैं खुशकिस्मत हूं तेरे आ जाने से
बदकिस्मत दिखाने के उनके बहुत से बहाने देखे हमने
उसकी पाकीजगी की पर हमें भरोसा था बहुत
अपने ही आशियां को मिटाने के फसाने देखे हमने
उन्हें अपनी वफ़ा पर हमसे भी था ज्यादा यकीन
अपनों में ही हमने बहुत से बेगाने देखे हमने
चाहता था उन्हें खुदा की मूरत समझ
खुदा की सूरत में मोहब्बत के दुश्मन देखे हमने
दीपक तले अंधेरा देखा हमने
अपनों में पर परायापन देखा हमने
दिखावा करते थे वह अपनी पाक मोहब्बत का
मोहब्बत के आशियां को उजड़ते देखा हमने
गीत बनकर संवर जाएगी मेरी कलम एक दिन
गीत बनकर संवर जाएगी मेरी कलम एक दिन
गजल बन कर निखर जाएगी मेरी कलम एक दिन
सद्विचारों का समंदर हो निखर उठेगी मेरी कलम एक दिन
गीत इंसानियत के रचेगी मेरी कलम एक दिन
पोषित करेगी संस्कारों का उपवन मेरी कलम एक दिन
मानवता से परिपूर्ण विचारों को रोशन करेगी मेरी कलम एक दिन
रिश्तों का एक समंदर रोशन करेगी मेरी कलम एक दिन
सिसकती सांसों को मुस्कुराहट से भर देगी मेरी कलम एक दिन
जिंदगी के गीतों से परिपूर्ण हो संवर जाएगी मेरी कलम एक दिन
सपनों की नगरी में सच का दंभ भरेगी मेरी कलम एक दिन
युवा पीढ़ी को संस्कारों से पोषित करेगी मेरी कलम एक दिन
संस्कृति व संस्कारों का समंदर हो जाएगी मेरी कलम एक दिन
नारी छवि को आसमां पर सुशोभित करेगी मेरी कलम एक दिन
धर्म के राजनीतिक ठेकेदारों पर वज्र बन टूट पड़ेगी मेरी कलम एक दिन
लिखेगी नई इबारत संस्कारों से पोषित समाज की मेरी कलम एक दिन
भटकती युवा पीढ़ी के लिए आदर्शों की पूँजी बन धरोहर हो जाएगी मेरी कलम एक दिन
गीत बनकर संवर जाएगी मेरी कलम एक दिन
गजल बन कर निखर जाएगी मेरी कलम एक दिन
सद्विचारों का समंदर हो निखर उठेगी मेरी कलम एक दिन
गीत इंसानियत के रचेगी मेरी कलम एक दिन
चुन ले आस के मोती , स्वप्न सजा मानवता के
चुन ले आस के मोती , स्वप्न सजा मानवता के
पंछी कब उड़ जाएगा, एहसास नहीं होगा तुझको
पीर पराई जान ले , उनके गम को अपना मान ले
बिखर – बिखर रह जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको
लम्हा – लम्हा जिंदगी की, डोर को तू थाम ले
वक्त यूं ही पराया हो जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको
पोस्ट, लाइक, कमेंट की , गुत्थी में ना उलझ
भ्रम जाल में फंस जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको
जोखिमों के इस शहर में, दो पल सुकून के जी ले
डोर सांसों की कब टूट जाएगी , एहसास नहीं होगा तुझको
प्रीत का एक समंदर , हो सके तो कर रोशन
खिलती कलियां कब मुरझा जायेंगीं , एहसास नहीं होगा तुझको
खुद से कर मोहब्बत , खुद का दुश्मन ना बन
राहे – मंजिल से कब भटक जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको
मन को दे संदेश, शक्ति का और शांति का
मोक्ष द्वार कब छूट जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको
चुन ले आस के मोती , स्वप्न सजा मानवता के
पंछी कब उड़ जाएगा, एहसास नहीं होगा तुझको
पीर पराई जान ले , उनके गम को अपना मान ले
बिखर – बिखर रह जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको
वक्त के साथ जो चलोगे, तो सफल हो जाओगे
वक्त के साथ जो चलोगे, तो सफल हो जाओगे
वक्त की कद्र जो न की , तो बिखर जाओगे
वक्त को अपनी मंजिल का हमसफर , जो बना लोगे तो मंजिल पाओगे
वक्त की कद्र जो न की , तो भटक जाओगे
वक्त से बेहतर कोई दूसरा दोस्त नहीं , जब यह समझ जाओगे
रोशन हो जाएंगी राहें , मंजिल की ओर बढ़ जाओगे
वक्त से करो मुहब्बत , वक्त पर निसार दो हर एक प्रयास
वक्त से जो फेर लिया मुंह , तो दिशा से भटक जाओगे
वक्त तेरा है और ,आने वाला हर पल भी
अपने प्रयासों को वक्त की जागीर करोगे ,तो सफल हो जाओगे
वक्त के आंचल में ,खुद को सवार कर देखो
खुशनुमा हो जाएगा जिंदगी का हर एक पल ,अभिनंदन की राह पाओगे
वक्त की वफादारी पर कभी शक ना करना ,मेरे दोस्त “अंजुम”
वक्त ने जो मुंह फेर लिया तो नेस्तनाबूद तो हो जाओगे
वक्त के हर पल को ,अपनी धरोहर कर लो
मिल जाएगी मंजिल ,आसमां पर छा जाओगे
वक्त के साथ जो चलोगे, तो सफल हो जाओगे
वक्त की कद्र जो न की , तो बिखर जाओगे
वक्त को अपनी मंजिल का हमसफर , जो बना लोगे तो मंजिल पाओगे
वक्त की कद्र जो न की , तो भटक जाओगे
हमें चाहिए आजादी
आजादी , कुविचारों से
आजादी, आधुनिक संस्कारों से
आजादी , दहकते युवा कुत्सित विचारों से
आजादी, लव जेहाद जैसे कुविचारों से
आजादी , धर्म के ठेकेदारों से
आजादी, धर्म के राजनीतिक गद्दारों से
आजादी, आतंक के रखवालों से
आजादी, राष्ट्रप्रेम का ढोंग रचने वालों से
आजादी, दहेज़ के चाहने वालों से
आजादी, संस्कारों को रूढ़िवादी विचार कहने वालों से
आजादी, धर्म को व्यापार समझने वालों से
आजादी, धर्म में भेद करने वालों से
आजादी, मानव को मानव न समझने वालों से
आजादी, इंसानियत के दुश्मनों से
आजादी , कुविचारों से
आजादी, आधुनिक संस्कारों से
आजादी , दहकते युवा कुत्सित विचारों से
आजादी, लव जेहाद जैसे कुविचारों से
पाकर तुझे मैं अपना , जीवन संवार लूं
पाकर तुझे मैं अपना , जीवन संवार लूं
खुद को तेरी राह पर , मैं निसार दूं
हो जाऊँ तेरा शागिर्द , अपनी पनाह में रख
तेरी इबादत को अपना, मकसद बना लूं
जागूँ तो तेरा नाम , लब पर हो मेरे
ख़्वाबों में तुझको, मैं अपना हमसफ़र बना लूं
तेरे करम का साया , हो मुझ पर मेरे मालिक
तुझको मैं अपनी जिन्दगी का इमां बना लूं
पाकर तुझे मैं खुद को , रोशन कर लूं
अपनी मंजिल का तुझे , मैं निशाँ बना लूं
रोशन हो जाए वजूद मेरा, तेरे करम से
अपनी कलम को , मैं तेरी इबादत कर लूं
तेरी इबादत में , ए मेरे मालिक
खुद को तेरा शागिर्द बना लूं
तेरे करम के चर्चे , हो रहे गली – गली
खुद को तुझ पर , मैं निसार दूं
पाकर तुझे मैं अपना , जीवन संवार लूं
खुद को तेरी राह पर , मैं निसार दूं
हो जाऊँ तेरा शागिर्द , अपनी पनाह में रख
तेरी इबादत को अपना, मकसद बना लूं
अंतिम सत्य ये , मैंने जाना
अंतिम सत्य , ये मैंने जाना
चार कन्धों पर होगा जाना
क्या लाया था, क्या ले जाना
क्यूं करें हम , कोई बहाना
छूट जायेगी जमीं , छूट जाएगा आसमां
रह जायेंगे यहाँ , तेरी यादों के निशाँ
क्या पराया, क्या कोई अपना
तेरे कर्मों से , रोशन होगा तेरा आशियाना
छूट जायेंगे सारे अभिनंदन , सारे पुरस्कार तेरे
रह जाएगा यहाँ , तेरे सत्कर्मों का खजाना
क्यूं कर भागते रहें हम , सपनों के पीछे
सपनों की चाह में खुद को, अपनी ही निगाह में नहीं है गिराना
करना हो तो करो रोशन , इंसानियत का परचम
जाने के बाद उस खुदा से, निगाह भी तो है मिलाना
उस खुदा की शागिर्दगी को , अपना मकसद कर
क्यूं कर उस खुदा के दर पर , है जाकर ठोकर खाना
अंतिम सत्य ये , मैंने जाना
चार कन्धों पर होगा जाना
क्या लाया था, क्या ले जाना
क्यूं करें हम , कोई बहाना