लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 2 November 2021

अंतिम सत्य ये , मैंने जाना

 अंतिम सत्य ये , मैंने जाना

अंतिम सत्य , ये मैंने जाना
चार कन्धों पर होगा जाना

क्या लाया था, क्या ले जाना
क्यूं करें हम , कोई बहाना

छूट जायेगी जमीं , छूट जाएगा आसमां
रह जायेंगे यहाँ , तेरी यादों के निशाँ

क्या पराया, क्या कोई अपना
तेरे कर्मों से , रोशन होगा तेरा आशियाना

छूट जायेंगे सारे अभिनंदन , सारे पुरस्कार तेरे
रह जाएगा यहाँ , तेरे सत्कर्मों का खजाना

क्यूं कर भागते रहें हम , सपनों के पीछे
सपनों की चाह में खुद को, अपनी ही निगाह में नहीं है गिराना

करना हो तो करो रोशन , इंसानियत का परचम
जाने के बाद उस खुदा से, निगाह भी तो है मिलाना

उस खुदा की शागिर्दगी को , अपना मकसद कर
क्यूं कर उस खुदा के दर पर , है जाकर ठोकर खाना

अंतिम सत्य ये , मैंने जाना
चार कन्धों पर होगा जाना

क्या लाया था, क्या ले जाना
क्यूं करें हम , कोई बहाना

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