क्यूँ कर पाला बदल लेते हैं लोग
क्यूँ कर पाला बदल लेते हैं लोग
क्यूँ कर स्वाभिमान को दांव पर लगा लेते हैं लोग
क्यूँ कर राजनीति अपने मार्ग से भटक रही है
क्यूँ कर कुर्सी के लिए अनैतिक रास्ते अपना रहे हैं लोग
जनता खुद को ठगा सा कर रही है महसूस
क्यूँ कर सपनों को धराशायी कर रहे हैं लोग
जिसको माध्यम बनाके खुद को किया स्थापित
उसी के घर में गड्ढे खोद रहे हैं लोग
रेवड़ी बांट बाँटकर लोगों को कर रहे हैं वो गुमनाम
कुर्सी के मोह मे, देश से गद्दारी कर रहे हैं लोग
क्यूँ कर पाला बदल लेते हैं लोग
क्यूँ कर स्वाभिमान को दांव पर लगा लेते हैं लोग l
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
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