लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Saturday, 1 January 2022

चुन ले आस के मोती , स्वप्न सजा मानवता के

 चुन ले आस के मोती , स्वप्न सजा मानवता के

चुन ले आस के मोती , स्वप्न सजा मानवता के
पंछी कब उड़ जाएगा, एहसास नहीं होगा तुझको

पीर पराई जान ले , उनके गम को अपना मान ले
बिखर – बिखर रह जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको

लम्हा – लम्हा जिंदगी की, डोर को तू थाम ले
वक्त यूं ही पराया हो जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको

पोस्ट, लाइक, कमेंट की , गुत्थी में ना उलझ
भ्रम जाल में फंस जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको

जोखिमों के इस शहर में, दो पल सुकून के जी ले
डोर सांसों की कब टूट जाएगी , एहसास नहीं होगा तुझको

प्रीत का एक समंदर , हो सके तो कर रोशन
खिलती कलियां कब मुरझा जायेंगीं , एहसास नहीं होगा तुझको

खुद से कर मोहब्बत , खुद का दुश्मन ना बन
राहे – मंजिल से कब भटक जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको

मन को दे संदेश, शक्ति का और शांति का
मोक्ष द्वार कब छूट जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको

चुन ले आस के मोती , स्वप्न सजा मानवता के
पंछी कब उड़ जाएगा, एहसास नहीं होगा तुझको

पीर पराई जान ले , उनके गम को अपना मान ले
बिखर – बिखर रह जाएगा , एहसास नहीं होगा तुझको

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