मुक्तक
जब तेरी कोशिशें दूसरों की ख़ुशी का पर्याय होने लगें
जब तेरे प्रयास दूसरों के ग़मों में विराम लगाने लगें
जब तेरी कोशिशें किसी के सूने जीवन में खुशियाँ लाने लगें
तब समझना कि तुम सद्चरित्रता को प्राप्त हो गए हो |
मेरी रचनाएं मेरी माताजी श्रीमती कांता देवी एवं पिताजी श्री किशन चंद गुप्ता जी को समर्पित
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