लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Friday, 20 May 2022

यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए

 यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए

कुछ तुम हमारे , कुछ हम तुम्हारे खैरख्वाह हो जाएँ
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |

चंद रातें तुम करो, चंद रातें हम करें रोशन
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |

चंद पल एक दूसरे की आगोश में , जिन्दगी की खुशनुमा याद हो जाएँ
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |

चंद कदम मैं चलूँ , चंद कदम तुम चलो , मंजिल नसीब हो जाए
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |

चंद मुस्कान तुम बिखेरो, चंद मुस्कान हम , जिन्दगी खुशियों का समंदर हो जाए
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |

कुछ तुम मुझे मनाओ, कुछ मैं तुमको , जिन्दगी खुशियों का अम्बार हो जाए
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |

कुछ तुम हमारे , कुछ हम तुम्हारे खैरख्वाह हो जाएँ
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |

चंद रातें तुम करो, चंद रातें हम करें रोशन
यूं ही चलते – चलते जिन्दगी की शाम हो जाए |

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