लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 13 June 2021

ये बारिश का मौसम , सुहाना ये मौसम

 ये बारिश का मौसम , सुहाना ये मौसम 

चलो भीग आयें, ये बूंदों का मौसम 


खुद को संभालें या उनकी दीवानगी को 

चलो भीग आयें , ये बहारों का मौसम 


बारिश से खिल उठा है रोम - रोम सभी का 

चलो भीग आयें , ये मस्ती का आलम 


बूंदों से मस्ती का पूरा हो चलन 

बादलों की गड़गड़  झमाझम ये मौसम 


अद्भुत नज़ारे, अनुपम ये फिजां है 

चलो कर आयें, प्रकृति से आलिंगन 


बारिश के गीतों से रोशन हुई है फिजायें 

चलो गुनगुनाएं , ये बारिश का मौसम 


तेरा मुस्कराना मेरे पास आना 

चलो भीग आयें , ये दीवानों  का मौसम 


बूंदों को अंजुल में चलो समेट आयें 

प्रकृति के अनुपम नज़रों का मौसम 


ये बारिश का मौसम , सुहाना ये मौसम 

चलो भीग आयें, ये बूंदों का मौसम 


खुद को संभालें या उनकी दीवानगी को 

चलो भीग आयें , ये बहारों का मौसम 



क्यूं आये हैं , इस धरती पर - भाग - एक

क्यूं आये हैं , इस धरती पर

क्या करना है, क्या पाना है 


भागती  - दौड़ती इस जिन्दगी में 

कहाँ रुकना है, कहाँ ठहर जाना है 


चाहतों का अंबार सजा है 

अभिलाषाओं का बाजार सजा है 


जाना कहाँ , किधर है हमको 

मंजिल का मार्ग घना है  


क्या पूछें , क्या किसे बताएं 

जीवन का आधार कहाँ है 


क्या सोचकर भेजा उसने 

इसका हमको पता कहाँ है 


क्या उद्देश्य है इस जीवन का 

जाना कहाँ , कहाँ रुकना है 


पीड़ा का अंबार सजा है 

अंतर्मन में कोहरा घना है 


बूझ नहीं पाया ये मानव 

जीवन ने क्या सत्य बुना है 


बिखरा  - बिखरा मानव का जीवन 

जीवन में अन्धकार घना है 


क्यूं आये हैं , इस धरती पर

क्या करना है, क्या पाना है 


भागती  - दौड़ती इस जिन्दगी में 

कहाँ रुकना है, कहाँ ठहर जाना है 




वो बारिश का मौसम

वो बारिश का मौसम , वो तेरा चहकना 

मेरे पास आना, और हौले से कानों में कहना 


वो तेरी मरमरी बाहें , वो तेरे चहरे का नूर 

वो  भीगना तेरा, और आकर मुझसे लिपटना 


वो मुस्कराना तेरा , वो पास आना तेरा 

भीनी  - भीनी खुशबू , वो चहचहाना तेरा 


नय्नूं से नयनों का मिलन हो रहा था 

पावन प्रेम का आलिंगन हो रहा था 


बहकती साँसों में डूबे थे हम तुम 

वो बिजली का गड़गड़ाना , तेरा मुझसे लिपटना 


वादों का एक दौर , हो गया था रोशन 

वो बारिश का मंजर हमारे प्यार का ठिकाना 


चाहतों का एक समंदर  हो रहा था रोशन

मेरी बाहों में तेरा होना, और दिलों का धड़कना 


साँसों से साँसों का मिलन हो रहा था 

वो तेरा बहकना , वो तेरा चहकना 


वो बारिश का मौसम , वो तेरा चहकना 

मेरे पास आना, और हौले से कानों में कहना 


वो तेरी मरमरी बाहें , वो तेरे चहरे का नूर 

वो  भीगना तेरा, और आकर मुझसे लिपटना 




Saturday, 12 June 2021

मेरे मालिक, मेरी सरकार हो जाओ

 मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 


मेरे दिल का सुकूँ , दिल का चैन हो जाओ 

मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 


मेरे ग़मों में मरहम , दर्द का ईलाज हो जाओ 

मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 


मेरे गीतों को ग़ज़ल कर दो , मेरी कलम का विस्तार हो जाओ 

मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 


मेरे सपनों को साकार  करो, मेरी मंजिल का किनारा हो जाओ  

मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 


मेरे आदर्शों का कारवाँ हो रोशन , मेरी जिन्दगी की पतवार हो जाओ 

मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 


मेरे चिंतन का समंदर करो रोशन, मेरे चिंतन मन का विस्तार हो जाओ 

मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 


मेरे आशियाने को करो रोशन, मेरे आशियाँ के खेवनहार हो जाओ 

मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 

 

मेरी सोच का रोशन करो एक पूर्ण आसमां , मेरे चिंतन का विस्तार हो जाओ 

मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 


मेरी कलम पर मेहरबान हो जाओ , मेरे विचारों का समंदर हो जाओ 

मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 


मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 

मेरे मालिक,  मेरी सरकार हो जाओ 

विचारों की गंगा बहाओ तुम भी

 विचारों में गंगा बहाओ तुम भी 


विचारों की गंगा बहाओ तुम भी 

गुलशन में कुछ पुष्प खिलाओ तुम भी 


चीर दो विचारों के तम को 

गुलशन में उजियारा फैलाओ तुम भी 


रोशन कर दो विचारों का समंदर  , रुकना नहीं 

विचारों की गंगा बहाओ तुम  भी 


शायरी और ग़ज़ल का कारवाँ भी  हो रोशन 

गुलशन में ग़ालिब बन छा जाओ तुम  भी 


मधुशाला जैसे विषयों पर करो एक कारवाँ रोशन 

गुलशन में बच्चन बन निखर जाओ तुम भी 


रचना की सभी विधाओं में होना पारंगत तुम 

गुलशन में कभी गीत कभी ग़ज़ल हो जाओ तुम भी 


कलम को विचारों की अनवरत , विचार धारा का हिस्सा बना लो 

गुलशन में विचारों का कारवाँ सजाओ तुम भी 


लिखो कुछ ऐसा , छूट जाएँ दुःख के बादल 

गुलशन में गम दूसरों के , चुराओ तुम भी 


रोशन करो अपने विचारों को , मानवीय विचारों से पुष्पित 

गुलशन में इंसानियत के पुष्प खिलाओ तुम  भी 


चंद अश'आर लिख दो , उस खुदा की इबादत में भी     

गुलशन में खुदा के नूर हो जाओ तुम भी 

 


Wednesday, 9 June 2021

ज़रा संभलकर - संस्मरण

 

ज़रा संभलकर

 

मैं अपने जीवन का एक संस्मरण आप सबके साथ साझा कर रहा हूँ हुआ यूं कि मेरे एक मित्र को खुद पर शायद ज्यादा ही विश्वास था यानी अतिआत्मविश्वास | दीपावली  का त्यौहार आया | गली – मोहल्ले में सभी अपने  - अपने घर की छत पर बिजली वाला रंगीन तारा लगाने की तैयारी कर रहे थे | मेरे मित्र को भी अपने घर पर तारा लगाने की सूझी और शुरू हो गया तारा बनाने की तैयारी | तारा बनकर तैयार हो गया | अब बिजली की तार  ढूँढने का काम शुरू हुआ | घर में एक कबाड़ के नाम से एक पुराना लोहे का डिब्बा था बस उसी में से तारों के छोटे  - छोटे टुकड़ों को इकठ्ठा किया गया और उन्हें जोड़  - तोड़कर उसमे प्लग लगाकर छत पर तारा लटका दिया गया |

         अब शुरू होता है मेरे दोस्त के अतिआत्मविश्वास का खेल |  तारा लग गया | दोस्त का दूसरा भाई तारे के जलने यानी चमकने को लेकर अतिउत्साहित था | किन्तु ये क्या हुआ  बिजली का बटन चालू करते ही पूरे घर की बिजली गुम  और जोर की आवाज “भूम – भड़ाम “ | सारे घबरा गए कि आखिर क्या हुआ | पता चला कि तारे का प्लग बोर्ड के पॉइंट से चिपक गया | घर के सारे फ्यूज उड़ गए |

              सभी सोच रहे थे कि  आखिर ऐसा क्यों हुआ ?  साड़ी खोजबीन करने पर पता चला कि बिजली के तारों को एक दूसरे के साथ जैसे रस्सी के सिरों को बांधकर गाँठ लगाईं जाती है उसी तरह से जोड़ा गया था | अब हमारे मित्र जनाब को समझ आ गयी कि किसी भी काम को करने से पहले किसी समझदार व्यक्ति से जानकारी ले लेनी चाहिए ताकि .......... भविष्य में भी ऐसी कोई घटना न हो |

              तो आप भी समझ गए होंगे कि .........अतिआत्मविश्वास कभी - कभी ..........!!!!!!!

मुक्तक

१. 


चंद दामन तू खुशियों से भर , चंद आशियाने तू कर रोशन

तेरी हर एक कोशिश को, खुदा का करम हो नसीब

२.



चंद फूल खिला . खुद पर क्यों इतरावें हम
फूलों का एक उपवन खिला, जिन्दगी को रोशन कर लें

3.



हमारी आरजू में कभी वो तड़पे , उनकी आरजू में कभी हम तड़पे
ये तड़प का दौर , आज भी बदस्तूर जारी है.

4.


कुछ गौत मैं उसके पेशे नज़र , कर दूं तो अच्छा हो
इसी बहाने मेरे दिल को करार , आ जाए तो अच्छा हो

Tuesday, 8 June 2021

मुक्तक

१.



कोशिशों की नाव हम समंदर में , क्यों
चलाया नहीं करते

मंजिल की राह में प्रयासों को हम
अपना, हमसफ़र क्यों बनाया नहीं करते




२.


क्यों हम किसी के काँधे का , सहारा
लिए चलें

क्यों न अपनी कोशिशों को , अपना
हमसफ़र किये चलें


3.

वक़्त के इशारे को जब , समझने
लगोगे तुम

रोशन तेरा जहाँ हो जाएगा, उस खुदा
का तुझ पर होगा करम



4.

वक़्त को अपने प्रयासों का हमसफ़र बना के
तो देख

मिलेगी मंजिल तुझको, नसीब होगी तुझे हर
एक रोज एक नई सुबह

Saturday, 5 June 2021

विचारों को अपने एक पैगाम दे दो

विचारों को अपने एक पैगाम दे दो 


विचारों को अपने एक पैगाम दे दो 

विचारों से खुला एक आसमान दे दो 


क्यूं कर भटक जाएँ विचारों की राहें 

आत्मविश्वास से पोषित एक आसमान दे दो 


चिंतन का हो जाए एक रोशन समंदर 

विचारों को अपने इबादत का नाम दे दो 


चिंतन का एक गुलशन हो जाए रोशन 

विचारों को अपने इंसानियत नाम दे दो 


चिंतन का विषय मानव कल्याण हो निखरे 

विचारों को अपने मानवता नाम दे दो 


तेरे विचार इस प्रकृति को अलंकृत कर दें 

विचारों को अपने प्रकृति का पैगाम दे दो 


विचारों को अपने एक पैगाम दे दो 

विचारों से खुला एक आसमान दे दो 


क्यूं कर भटक जाएँ विचारों की राहें 

आत्मविश्वास से पोषित एक आसमान दे दो 



अभी तक संभाला है तूने मुझे

अभी तक संभाला है तूने मुझे 


अभी तक संभाला है तूने मुझे 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


अभी तक संवारा है तूने मुझे 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


अभी तक रोशन किया तूने मुझको 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


अभी तक दिखाई है राह तूने मुझको 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


मेरे आशियाँ को रोशन किया है तूने 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


गिरने से बचाया है तूने मुझे 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


सितारे मेरी किस्मत के बुलंद किये तूने

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


रोशन की है कलम मेरी तूने 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


आँखों का तारा किया तूने मुझको 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


मेरे दामन को पाक  - साफ़ किया तूने 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


अभी तक संभाला है तूने मुझे 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक 


अभी तक संवारा है तूने मुझे 

आगे भी रखना ख्याल मेरे मालिक