लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Monday, 6 April 2015

इंतिकाम से कुछ हासिल नहीं होता

इंतिकाम  से कुछ हासिल नहीं होता

इंतिकाम  से कुछ हासिल नहीं होता
इल्तिफ़ात (दया , कृपा ) से दोस्ती कर लो
भटकने से कुछ हासिल नहीं होता
खुदा की इबादत कर लो

उम्मीद से कायम है जहाँ
बेगुनाहों की वकालत कर लो
गुमराह होने से कुछ हासिल नहीं होता
लोगों के दिल में जगह कर लो

ख्वाहिशों के समंदर में यूं न डूबो
ख्वाहिशों को ज़ज्ब कर लो
इंसानियत का देर छोटा नहीं होता
दो-चार जरूरतमंदों की मदद कर लो

वक़्त का कोई भरोसा नहीं होता
किसी के दिल में जगह कर लो
अफसाना न हो जाए जिन्दगी
किसी के आंसुओं को कम कर लो

आजमाईश के दौर भी आते हैं जिन्दगी में
खुदा की राह में खुद को न्योछावर कर लो
जिन्दगी को रोशन करना है तो
कुछ कदम खुदा की राह पर चल लो

चमकेगा तेरी भी किस्मत का सितारा
दो वक़्त खुदा की इबादत कर लो
भाग्य तेरा भी चमकेगा
किसी की राहों के कांटे चुन लो



धरती को हम स्वच्छ बनायें, आओ हम मिल पेड़ लगायें

धरती को हम स्वच्छ बनायें, आओ हम मिल पेड़ लगायें 

धरती को हम स्वच्छ बनायें, आओ हम मिल पेड़ लगायें 
गली – गली और कोना – कोना , आओ हम मिल स्वच्छ बनायें
नदियों को हम पावन कर दें , तालों को भी स्वच्छ बनायें
महके देश का कोना – कोना , आओ हम मिल देश सजायें

बापू के सपने को लेकर , घर – घर जाकर अलख जगायें
स्वच्छ भारत का सपना , हर भारतीय के मन में जगायें
गाँव – गाँव और शहर – शहर , स्वच्छ भारत की ज्योत जगायें
पावन हों तन पावन हो मन , ऐसा स्वस्थ भारत बनायें

चाँद सी चमकें सारी गलियाँ , सूर्य सी दमकें सब नदियाँ
हम कुछ ऐसा कर दिखायें , भारत को हम स्वच्छ बनायें
बच्चे , बूढ़े और जवां , सब स्वच्छता के गीत गायें
मन हों कोमल तन हों सुन्दर , ऐसी सुन्दर भावी पीढ़ी बनायें

नेता हो या अभिनेता , सभी स्वच्छता अभियान चलायें
लोगों के घर – घर जाकर , स्वच्छता का परचम लहरायें
पानी को हम स्वच्छ बनायीं , धरती की ऊर्जा बढायें
मंदिर , मस्जिद सभी हों पावन , आओ हम मिल स्वच्छ बनायें

स्कूलों , कालेजों के बच्चों आओ , सब मिल यह अभियान चलाओ
भारत के हर एक नागरिक को , स्वच्छता का महत्त्व समझाओ
स्काउट-  गाइड की सेवा से , भारत को मिल स्वच्छ बनाओ
पावन हो देश का कोना – कोना , ऐसे स्वच्छ विचार अपनाओ





Sunday, 5 April 2015

गुबार दिल के सभी दूर हो गए - मुक्तक

१.


गुबार दिल के सभी दूर हो गए 

तेरी बाहों का सहारा मिला जो मुझको 



२.


तेरी आँखों के रास्ते तेरे दिल में उतरने की तमन्ना मेरी 

दो पल के लिए ही सही आँखों में सुरमा तो लगा  

3.


ये गुलशन का कोना - ओना , तेरे हुस्न की खुशबू से महकने लगा 

तुम रोज यूं ही इस गुलशन में आया करो 



4.

मैं तुझे शायरी कहूं या कहू  ग़ज़ल 

तेरे हुस्न ने शायर किया मुझको 


5.

चाँद भी मुस्कुरा रहा है अदाओं पर  तेरी 

हम  मुहब्बत के मारों का ज़रा ख्याल करो 

६.


तेरे इश्क़ ने ग़ालिब लिया मुझको 

तेरी हर एक अदा , एक अलग ग़ज़ल बयाँ करती है 








हमने छोड़ा ये जहाँ तेरे इश्क की खातिर



१.

हमने छोड़ा ये जहां , तेरे इश्क़ की खातिर 

मैं चाहता हूँ , मेरा इश्क़ बदनाम न हो 


२.



उसकी बेवफाई ने बहुत ज़ख्म दिए हैं मुझको 

मेरी नासमझी थी , मैं उसे  मुहब्बत का खुदा समझ बैठा 

3.

जाम पर जाम पिए जा रहा है वो 

उसे अपनी मुहब्बत पर शायद एतबार नहीं 


4.

उसकी बेवफाई ने उसे , उसका दीवाना कर दिया 

ऐसी मुहब्बत मेरे खुदा, नसीब हो मुझको 



5.

ग़ज़ल है तू, ,  शायरी जुल्फें तेरी 

दो पल तेरे पहलू में गुजारें हम,  तो जन्नत नसीब हो हमको  





इश्क में हर दिल का यही हाल होता है

१.

इश्क़ में हर एक दिल का हाल यही होता है 

न दिन में चैन , न रात को करार होता है 


२.

उनका बुर्के में होना , हमको नागवार होता है 

बुरका हेट तो मुहब्बत के खुदा का , दीदार हो हमको 

3.



इम्तिहाँ मुहब्बत में और भी हैं जानम 

तू  मुझे छोड़कर जाने का बहाना न बना 

4.


तेरी जुल्फों का सहारा , जो मिल जाए मुझे 

ताउम्र तेरी आगोश में बिता दूंगा मैं 


5.

नज़र आता है खुदा, मुझको तेरी आँखों में 

खुदा करे मेरी इबादते  - इश्क़ क़ुबूल हो उसको 







शिक्षा जब नैतिकता का परिमाण हो जाए - शिक्षा पर मेरे विचार

१.


शिक्षा जब नैतिकता का परिमाण हो जाए

शिक्षा जब सृजनात्मकता का आधार हो जाए

शिक्षा जब रचनात्मकता का विस्तार हो जाए

समझना शिक्षा स्वयं के अस्तित्व को संजो रही है 

२.

शिक्षा जब नैतिक मूल्यों का विस्तार हो जाए.

 शिक्षा जब संस्कृति व संस्कारों का आधार हो जाए

शिक्षा जब बच्चों को सामाजिकता सिखाये

 समझ लेना शिक्षा अपने पावन उद्देश्य में सफल हो  रही है 

3.

शिक्षा जब इंसानियत की राह दिखाने लगे

शिक्षा जब खुदा की इबादत सी होने लगे

शिक्षा जब जीवन का मर्म समझाने लगे

समझो शिक्षा के केंद्र ,देवालय से सजने लगे हैं

4.


शिक्षा के केंद्र जब समाज सेवा का अर्थ बताने लगें

शिक्षा जब मुक्ति का मार्ग समझाने लगे

शिक्षा जब माँ की लोरियों की तरह पावन होने लगे

समझना माँ शारदे की हम पर असीम कृपा होने लगी है





Thursday, 12 March 2015

वक़्त रहते जो कोशिश न की तो दिल में मलाल रह जाएगा


१.

वक़्त रहते जो कोशिश न की तो दिल में मलाल रह जाएगा

बयाँ जो वफ़ा - ए  - मुहब्बत न की तो इश्क गुमनाम हो जाएगा

दिल की बात दिल में रह जाए तो नासूर हो जायेगा

किसी का दर्द जो न बांटा तो बदनाम हो जाएगा


२.

दूसरों के गम जो बांटे तो खुदा मेहरबान हो जाएगा

किसी के प्यार से वफ़ा जो की तो इश्क खुदा हो जाएगा

किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया तो इंसान खुदा हो जाएगा

किसी के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी तो खुदा तेरे करीब हो जाएगा

3.

किसी गिरते को उठाया तो इंसानियत का चेहरा मुस्कुराएगा

किससे जो देश प्रेम के तू गायेगा , तो तरा नाम अमर हो जाएगा

खिलाओगे जो फूल गुलशन में , ये गुलशन फूलों का समंदर हो जाएगा

किया जो तूने गुरु का सम्मान , तेरा व्यक्तित्व अमर हो जाएगा



4.


दिए जो पंक्षी को दाने तो मानव धर्म पल्लवित हो जाएगा 

मिली जो दो बूँद प्यासे को मानवता का अश्क गुनगुनाएगा

पुण्य जो तेरे कर्म हुए तेरा नाम अमर हो जाएगा 

इबादत को जो तूने अपना धर्म बनाया तू खुदा के करीब हो जाएगा





किताबों के पन्नों से रोशन हुए ख़्वाब - मुक्तक

१.

किताबों के पन्नों से रोशन हुए ख़्वाब
उम्मीद के बादलों से रोशन हुए जिगर 

इंतिकाम में रखा नहीं कुछ भी दोस्त
दोस्ती की  इबादत से रोशन हुए शहर 


२.

खुश्क चेहरा लिए मुस्कुरा रहा है वो

गीत इबादत के गुनगुना रहा है वो

जख्म खाए हैं उसने जमाने में

फिर भी इडानियत की राह दिखा रहा है


3.


उन्हें हमारी मुहब्बत और हमारा साथ गंवारा न हुआ 

उन्हें हमारी बेकरारी , हमारा प्यार जाहिर न हुआ 

हम चाहते रहे उन्हें बिक मन , ऐ मुहब्बत के खुदा 

हमारा प्यार , हमारा जुनूने  - ए - मुहब्बत गंवारा न हुआ



4.


अपना समझ के मैंने अज़ीज़ कर लिया उन्हें

इम्तिहां और भी हैं आजमाइश के इस दौर में

ऐसा भी कोई हो जिसे मैं अपना कह सकूं

किस पर करें भरोसा इस क़यामत  के दौर में




चश्मे बददूर है तू, मेरे दिल का नूर है तू - अंदाज़े शायरी

१.


चश्मे बददूर है तू, मेरे दिल का नूर है तू

मैं चाहता हूँ तुझको, मेरे दिल के करीब है तू

मेरी आशिकी है तुझसे , मेरी मुहब्बत की आरजू है तू

चश्म - ओ - चिराग हो जानम , मेरी शायरी का आगज़ है तू

२.



गुमान न कर तू , अपने हुख पर ऐ जानम

मैं गिरिफ्तार तेरी हर एक अदा पर हुआ

तेरी खामोश निगाहें बता रहीं सब कुछ

मेरी जानम तुझको भी मुझसे प्यार हुआ


3.


तेरे ख़्वाबों से रोशन है , मेरे ख़्वाबों की दुनिया

ख्वाहिश है मेरा ख्याले मुहब्बत , तेरा ख्याले इश्क हो जाए

पलक बिछा के बैठे हैं तेरी राह में हम

तू मेरे ख्वाहिशे इश्क का शुरूर हो जाए


4.


खुशनसीब हैं वो कायम है जिनकी कलम का जादू

खुशनसीब हैं वो कायम है जिनकी शायरी का वजूद

खुशनसीब हैं वो जिनकी  सत्ता में रोशन हुए लाखों घर

खुशनसीब हैं वो जिन पर हुई उस खुदा की मेहर




Wednesday, 11 March 2015

हमें उनसे रूठने की आदत ही सही

हमें उनसे रूठने की आदत ही सही

हमें उनसे रूठने की आदत ही सही
उन्हें हमें न मनाने की आदत ही सही

रश्क़ नहीं है हमको उनकी खूबसूरती  से
उन पर मर मिटने की हमारी हसरत ही सही

ताउम्र जिनके ग़मों का हिस्सा हुए थे हम
उन्हें हमसे मुहब्बत न सही ,अदावत ही सही

जिनकी यादों में हमने गुजरीं रातें रो- रोकर
उन्हें हमसे मुहब्बत न सही , नफरत ही सही

हमने उनको अपना दुश्मन नहीं समझा
मुझसे दोस्ती न सही , गैर से मुहब्बत ही सही

मुझे तुझसे वफ़ा की उम्मीद थी जानम
मुझसे जफा ही सही , गैर से वफ़ा ही  
सही

उनके बुरे वक़्त का सहारा हुए थे हम
हमसे दुश्मनी ही सही , गैरों से दोस्ती ही सही

उनके इश्क में तनहा गुजरीं थी कई रातें मेरी
वो मेरे हुए न सही , गैर की बाहों में सही

हमें उनसे रूठने की आदत ही सही

उन्हें हमें मनाने की आदत ही सही