लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Friday, 3 June 2016

तुझको पलकों पर बिठा लूं मैं

तुझको पलकों  पर बिठा लूं मैं 

'तुझको पलकों  पर बिठा लूं मैं , कुछ ऐसा करम करना मौला 
'तुझको सपनों में सजा लूं मैं , कुछ ऐसा करम करना मौला 

'तुझ पर मैं कुर्बान हो जाऊं , कुछ ऐसा करम करना मौला 
मुझे तुझसे मुहब्बत हो जाए, कुछ ऐसा करम करना मौला 

'तुझको खुदा कर लूं मैं अपना , कुछ ऐसा करम करना मौला 
तेरे दर को अपना आशियाँ कर लूं अपना, कुछ ऐसा करम
करना मौला 

ख्वाहिश है तेरी खिदमत मैं करूं , कुछ ऐसा करम करना मौला 
ख्वाहिश है मैं तेरा जवाहर हो जाऊं , कुछ ऐसा करम करना
मौला 

तेरे क़दमों को मैं जन्नत कर लूं, कुछ ऐसा करम करना मौला 
'तेरा मुरीद मैं हो जाऊं , कुछ ऐसा करम करना मौला 




जीवन बंधन से मुझे मुक्त कर दो


जीवन बंधन से मुझे मुक्त कर दो

जीवन बंधन से मुझे मुक्त कर दो.
मुझको चिर निद्रा का सुख दो

पीर  मेरी सब मुझसे छूटे
मुझे उजाले का अम्बर दो

व्याप्त हो सकू मैं इस नभ  में
मुझे पंचतत्व में विलीन कर दो

जग की माया झूठी माया
मुझको बंधनों से दूर कर दो.

रखना हो गर मुझको इस तन मैं
भक्ति का मुझे सागर कर दो

मुझे भोग में रूचि न देना
सत, चित , सुन्दर पावन कर दो

गीता का मुझे जान नहीं है.
 निष्काम कर्मयोग का रस दो

स्वयं की मुझको चिंता न हो
पर उपकार जीवन धन कर दो 

है जग के स्वामी जगदीश्वर
अपने चरणों की मुझको रज दो

है वासुदेव मैं शरण तुम्हारी
मुझको मोक्ष मार्ग का वर दो

जीवन बंधन से मुझे मुक्त कर दो.
मुझको चिर निद्रा का सुख दो

पीर  मेरी सब मुझसे छूटे
मुझे उजाले का अम्बर दो






किसी के कुछ कहने से फर्क नहीं पड़ता है मुझे


किसी के कुछ कहने से फर्क नहीं पड़ता है मुझे

किसी के कुछ कहने से फर्क नहीं पड़ता है मुझे
मेरे सपनों की दुनिया ही अजब निराली है

मैं टूटता नहीं मैं बिखरता नहीं , कटु  वचनों से
मेरी संस्कृति , संस्कारों की छटा अजब निराली है

मेरे विचार , मेरे सिद्धांत कभी डगमगाते नहीं , पर निंदा से
मेरे आदर्शो की दुनिया ही अजब निराली है

मैं क्यों कर बिखर जाऊं , एक ठोकर से
मेरे प्रयासों की दुनिया ही अजब निराली है.

गिरकर संभल जाने की कला आती है मुझे
मेरी कोशिशों की दुनिया ही अजब निराली है.

किसी की बदनीयत सोच क्या बदलेगी तकदीर मेरी.
मेरी इबादत की दुनिया ही अजब निराली है
.
किसी दूसरे के विचारों से प्रभावित नहीं होता हूँ मैं
मेरे सुविचारों की छटा ही अजब निराली है.

मेरे दुश्मनों तुमने किया मेरे प्रयासों को सार्थक
मेरी शुक्रिया कहने की कला भी अजब निराली है.



कान्हा पुकारे राधा दौड़ी चली आये - भजन


कान्हा पुकारे राधा दौड़ी  चली आये - भजन 

कान्हा पुकारे, राधा दौड़ी  चली आये
वंशी बजाये कान्हा , राधा दौडी चली आये.

कान्हा पुकारे , गउएं दौड़ी चली आयें
वंशी बजाये कान्हा , गउएं दौडी चली आये

कान्हा पुकारे , वाले दौड़े चले आये
वंशी बजाये कान्हा , ग्वाले दौड़े चले आये.

मथुरा मैं पुकारें कान्हा , वृंदावन मैं पुकारें 
जब भी पुकारें कान्हा , हम दौड़े चले आये

दही भी लाये कान्हा , माखन भी लाये
जल्‍दी - जल्दी आओ कान्हा , भोग लगायें

दीपक जलाये कान्हा , धूप दिखायें
पुष्पों की वर्षा करें , शीश नवायें

'छप्पन तरह के तुझको , भोग  लगाएं
मन मैं बसाएं तुझको , भजन तेरे गायें

कष्टों को हरना कान्हा , जब भी  पुकारें
चरणों मैं रखना प्रभु , आये तेरे दवारे


और उड़ना, मेरा किरदार हो गया

और उड़ना,  मेरा किरदार हो गया

और उड़ना ,मेरा किरदार हो गया.
गिर-गिरकर संभलना ,मेरा विस्तार हो गया

मैं जानता हूँ, मेरे प्रयास मेरी अमानत हैं
मेरी कोशिशें, मेरे प्रयास ,मेरा संसार हो गया.

और उड़ना ,मेरा किरदार हो गया.
मेरे पंखों को मिली ,आसमां की उड़ान

मेरे अरमानों को ,नसीब हुई जन्नत
खुला आसमां ,मेरे जीने का आधार हो गया

मेरा चिंतन करना ,मेरा किरदार हो गया
सफल होना ,मेरा संसार हो गया.

फूल प्रयासों के बिखेरे ,मैंने उपवन में
मेरे प्रयासों का उपवन ,गुलज़ार हो गया

मेरा बिखरना ,मेरा विस्तार हो गया
मेरी कोशिशों का सफ़र, मेरी सफलता का आधार हो गया.



एक तेरी नज़रे करम का साया

 तेरी नज़रे--करम का साया

'एक तेरी नज़रे--करम का साया ,मुझ पर हो जाए तो अच्छा
मेरे सपनों को तेरे करम का ,आसमां मिल जाए तो अच्छा

मेरी इबादत तेरे हुज़ूर में ,कुबूल हो जाए तो अच्छा
तेरी खुदाई ,मेरा ईमान हो जाए तो अच्छा

मेरे अरमान ,तेरी धरोहर हो जाएँ तो अच्छा
तेरे करम से आफताब सी ,मेरी शख्सियत रोशन हो जाए तो अच्छा

तेरे दर का मैं ,चराग हो जाऊं तो अच्छा
सितारों सी बुलंद ,मेरी शख्सियत हो जाए तो अच्छा

कुर्बान मैं खुद को ,तुझ पर कर लूं तो अच्छा
तेरी इबादत में मेरी सुबह -शाम ,गुजर हो जाए तो अच्छा

मेरे ख़वाबों को तेरे करम की छाँव, मिल जाए तो अच्छा
तेरे बन्दों की खिदमत में मेरी जिन्दगी ,गुज़र जाए तो अच्छा

ख्वाहिश है तेरे नाम का सहारा ,मुझे मिल जाए तो अच्छा
आशियाँ मेरा भी तेरे करम से ,रोशन हो जाए तो अच्छा

मेरे खुदा मुझे भी अपना गुलाम ,बना ले तो अच्छा
मैं जब तक भी जियूं, तेरी इबादत ,मेरा ईमान हो जाए तो अच्छा

'एक तेरी नज़रे--करम का साया ,मुझ पर हो जाए तो अच्छा
मेरे सपनों को तेरे करम का ,आसमां मिल जाए तो अच्छा

मेरी इबादत तेरे हुज़ूर में ,कुबूल हो जाए तो अच्छा
तेरी खुदाई ,मेरा ईमान हो जाए तो अच्छा



Monday, 9 May 2016

हकीकत पर अफवाहों की धुंध न पड़ने दो


हकीकत पर अफवाहों की धुंध न पड़ने दो

हकीकत पर ,अफवाहों की धुंध न पड़ने दो
पावन मन पर ,कुविचारों का जाल न पलने  दो

अपयश के क्षय से ,कर्तव्य की राह न छोड़ो
प्रयासों पर ,आशंका की परत न जमने दो

अपकार करने वालों पर भी ,उपकार का मरहम लगाकर देखो
अपने स्वस्थ विचारों पर ,संदेह की परत न जमने दो

अपने रक्त की ,हर एक बूँद को पावन करना
अपने कोमल तन पर ,नशे की बुरी छाया न पड़ने दो

अपने हृदय को ,सागर सा विशाल कर देखो
अपनी पावन सोच पर :कुविचारों की बुरी छाया न पड़ने दो

स्वयं को संतों सा , पीरों सा पुष्पित कर देखो
अपने जीवन पर ,माया--मोह की काली छाया न पड़ने दो

खुद को ,हिमालय की तरह स्थिर कर देखो
अपनी कोशिशों पर ,आशंकाओं की धूल न पड़ने दो

स्वयं पर विश्वास , स्वयं को प्रफुल्लित कर देखो
स्वयं पर ,अहंकार और लालसा की धुंध न पड़ने दो

स्वयं को ,उत्कर्ष की राह पर प्रस्थित कर देखो
अपनी कोशिशों पर ,अहं की काली छाया न पड़ने दो

स्वयं को ,उस परमात्म तत्व पर समर्पित कर देखो
अपनी आस्था और विश्वास पर ,अंधविश्वास की काली परत न जमने दो

हकीकत पर ,अफवाहों की धुंध न पड़ने दो
पावन मन पर ,कुविचारों का जाल न पत्नने दो

अपयश के क्षय से ,कर्तव्य की राह न छोड़ो
प्रयासों पर ,आशंका की परत न जमने दो




Friday, 6 May 2016

हे दयालु, दया के सागर

हे दयालु, दया के सागर

है दयालु, दया के सागर , शक्ति का संचार हो तुम
पावन कर दो हम सब को प्रभु , मुक्ति का आधार हो तुम

जगत को तुम पालते प्रभु, जीवन ज्योति विस्तार हो तुम
कर्तव्य राह तुम प्रभु दिखाते, सुकर्म का आधार हो तुम

वात्सल्य से पुष्पित करते, संस्कृति का विस्तार हो तुम
मातृत्व से रोशन जीवन , संस्कारों का आधार हो तुम

आस्तिकता से पोषित करते, सौभाग्य का विस्तार हो तुम
रिश्तों को तुम सत्य बताते, प्रेम का आधार हो तुम

विश्व का आधार हो तुम


विश्व  का आधार हो तुम

विश्व का आधार हो तुम,
 शांति का आभास हो तुम

जी रहे जो पुण्य होकर,
 आस्था और विश्वास हो तुम

है दयामय, हे उपकारी,
 मानवता का विस्तार हो तुम

है हिमालय--शिखर वासी,
 जीवन का आधार हो तुम

देवत्व का आभास हो तुम, 
ऐश्वर्य का वरदान हो तुम

है जगत आधार मेरे प्रभु
 सत्कर्म का विस्तार हो तुम

आस्तिक हों विचार मेरे,
 धर्म का सार हो तुम

मिले सबको तेरी चरण रज , 
मोक्ष का आधार हो तुम

करो सबका भाग्य रोशन, 
सौभाग्य का विस्तार हो तुम

चीर दो तम को इस जहाँ से,
 पुष्पित जीवन विस्तार हो तुम



Thursday, 5 May 2016

चंचल मन को पावन कर दो


चंचल मन को पावन कर दो

चंचल मन को पावन कर दो ,मुझको भक्ति का वर दो
जीवन को आनंदित कर दो, सद्विचारों से पुष्पित कर दो

हे  परमेश्वर हे परमेश्वर

हे मेरे प्रभु, तुम हो अति पावन ,हे मेरे प्रभु , तुम हो अति आवन
माया--मोह से हमें बचाओ , अभिमानी न हमें बनाओ.

हे परमेश्वर हे परमेश्वर

संस्कार मन भावन कर दो , सत्कर्म से पुष्थित कर दो
कोमल से कोमलतम कर दो , प्रिय से प्रभु प्रियतम कर दो

हे परमेश्वर हे परमेश्वर

जीवन ज्योति  रोशन कर दो , मन मंदिर अति पावन कर दो.
पवित्र से प्रभु पवित्रतम कर दो . श्रेष्ठ से प्रभु श्रेष्ठतम  कर दो

हे परमेश्वर हे परमेश्वर

चरण कमल का देकर सहारा , जीवन मेरा स्वर्ग बना दो.
मर्यादित जीवन हो मेरा, भाग्य मेरा प्रभु रौशन कर दो

हे परमेश्वर हे परमेश्वर

मन तेरे दर्शन का प्यासा , पर उपकार मेरा धर्म कर दो
सज्जनता को धारण कर लूं . मानवता हित मैं जीवन वर दूं

हे परमेश्वर हे परमेश्वर