लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 9 May 2016

हकीकत पर अफवाहों की धुंध न पड़ने दो


हकीकत पर अफवाहों की धुंध न पड़ने दो

हकीकत पर ,अफवाहों की धुंध न पड़ने दो
पावन मन पर ,कुविचारों का जाल न पलने  दो

अपयश के क्षय से ,कर्तव्य की राह न छोड़ो
प्रयासों पर ,आशंका की परत न जमने दो

अपकार करने वालों पर भी ,उपकार का मरहम लगाकर देखो
अपने स्वस्थ विचारों पर ,संदेह की परत न जमने दो

अपने रक्त की ,हर एक बूँद को पावन करना
अपने कोमल तन पर ,नशे की बुरी छाया न पड़ने दो

अपने हृदय को ,सागर सा विशाल कर देखो
अपनी पावन सोच पर :कुविचारों की बुरी छाया न पड़ने दो

स्वयं को संतों सा , पीरों सा पुष्पित कर देखो
अपने जीवन पर ,माया--मोह की काली छाया न पड़ने दो

खुद को ,हिमालय की तरह स्थिर कर देखो
अपनी कोशिशों पर ,आशंकाओं की धूल न पड़ने दो

स्वयं पर विश्वास , स्वयं को प्रफुल्लित कर देखो
स्वयं पर ,अहंकार और लालसा की धुंध न पड़ने दो

स्वयं को ,उत्कर्ष की राह पर प्रस्थित कर देखो
अपनी कोशिशों पर ,अहं की काली छाया न पड़ने दो

स्वयं को ,उस परमात्म तत्व पर समर्पित कर देखो
अपनी आस्था और विश्वास पर ,अंधविश्वास की काली परत न जमने दो

हकीकत पर ,अफवाहों की धुंध न पड़ने दो
पावन मन पर ,कुविचारों का जाल न पत्नने दो

अपयश के क्षय से ,कर्तव्य की राह न छोड़ो
प्रयासों पर ,आशंका की परत न जमने दो




1 comment:

  1. बहुत बढ़िया प्रयास गुप्ता जी |

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