लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Sunday, 13 December 2015

बसता है जीवन का संगीत


बसता है जीवन का संगीत 

नदियों की कल- कल में , फूलों की खुशबुओं में
फूलों के उपवन में, पर्वतों के झरनों में

बसता है जीवन का संगीत

पर्वतों की घाटियों में , झूमते बादलों में
मयूर के नृत्य में, पक्षियों के कलरव में

बसता है जीवन का संगीत

कोयल की कूक में, बन की शान्ति में
बच्चों की मुस्कान में, बालपन की चंचलता में

बसता है जीवन का संगीत

बस्ते का बोझ लिए कॉँधे पर लिए, ज्ञान की राह पर बढ़ते बचपन में
संस्कृति , संस्कारों की पूँजी में, आदर्शों की धरोहर में

बसता है जीवन का संगीत

संवेदनाओं के झुरमुट में, अभिनन्दन की राह में
मोक्ष की तृष्णा में , भक्ति की राह में

बसता है जीवन का संगीत

ईश्वर अराधना में, प्रकृति के सौन्दर्य में
पुरुषों के पुरुषत्व में, नारी के यौवन में

बसता है जीवन का संगीत

ज्ञान के सागर में, भक्ति के भवसागर में
सद्विचारों की गंगा में, माँ सरस्वती के चरणों में

बसता है जीवन का संगीत

माता के आँचल में, पिता की छत्र -- छाया में
बचपन की यादों में, बचपन की बातों में

बसता है जीवन का संगीत

नदियों की कल- कल में , फूलों की खुशबुओं में
फूलों के उपवन में, पर्वतों के झरनों में









बीमार दिल क्या बयाँ करे इजहारे - मुहब्बत

बीमार दिल क्या बयाँ करें इजहारे--मुहब्बत

बीमार दिल क्या बयाँ करें इजहारे--मुहब्बत
इश्क खुशनुमा और जवां दिल्लों की चाहत से हों रोशन

इश्क को अंजाम की परवाह नहीं , दुनिया का लिहाज़ नहीं
इश्क का अपना होता है खुदा, इसे दुनिया की परवाह नहीं

इश्क अजनबी को भी अजीज बना देता है
ये वो शै है जो इंसान को खुदा बना देता है

इश्क अफसाना नहीं जो पढ़ा और भूल गए
इश्क में डूबकर ही , अंजामे--इश्क का एहसास होता है

इश्क़ में तेरे अरमान, तेरी अमानत हो जायें
उस आसमानी खुदा के करम पर एतबार तो कर

इश्क में जो डूबे. फरिश्ता हो जाया करता है
देता है दिल को सुकून . ग़मों से पराया करता है

इश्क को मजहब की दीवारों में क्या कैद करे कोई
इश्क का मजहब. इश्क के ईमान से हो रोशन

डश्क से फिजां हो रोशन. इश्क से आशियाँ हो रोशन
इश्क से खुदा का दर रोशन. इश्क से सारी कायनात रोशन

बीमार दिल क्या बयों करें इजहारे. मुहब्बत
इश्क खुशनुमा और जवां दिलों की चाहत से हों रोशन





तेरे चरणों का मिले जो सहारा


तेरे चरणों का मिले जो आसरा

तेरे चरणों का मिले जो आसरा
जीवन ज्योति जलाऊँ भगवन 
तेरे चरणों की मिले जो धूलि
जीवन को महकाऊँ भगवन

तेरे चरणों में पले जो बचपन
भक्ति  मार्ग पर जाऊं भगवन
मेरी अभिल्राषा पूर्ण कर दो
तुमको भोग लगाऊँ  भगवन

तेरा दर हो मेरा ठिकाना
निर्दोष कर्म से सजाओ भगवन 
प्रभु प्रेम जाल में फंसाओ मुझको
तेरा भक्त हों जाऊं भगवन

प्यासे की प्रभु प्यास बुझाओ
करूँ समर्पित जीवन भगवन 
भाग्य मेरा प्रभु रोशन कर दो
सुबह--श्याम तुझे ध्याऊं भगवन

तेरी दया का मिले जो सहारा
मोक्ष मार्ग पर जाऊं भगवन




बचपन को खिलने दो


बचपन को खिलने दो

बचपन को खिलने दो , खुशियाँ भर जीने दो
बस्ते का बोझ न हो, जी भर मचलने दो

बचपन की बातों को , बचपन की यादों को
खुशबुओं से भरने दो, खुशियों को संवरने दो

नटखट इन चरित्रों को, चंचल हो जाने दो
बचपन का ढेर सा , प्यार मिल जाने दो

बचपन के खेलों में, बचपन को डूब जाने दो
हाथ में हो गिल्ली--डंडा , पतंग को उड़ जाने दो

बचपन की मासूम मुस्कान, चेहरे पर खिल जाने दो
बचपन को बचपन की, बाहों में संवरने दो

बालमन को सरिता सा ,पावन हो बहने दो
बचपन की शरारतों को , मनभावन हो जाने दो

बालपन को पुस्तकों के, रंगों में रंग जाने दो
बच्चों के बालमन में, प्रश्नों को उपजने दो

बालमन के शून्य मन में, उत्कंठा पनपने दो
स्रेह की प्यारी आँखों को, प्यार का दम भरने दो

बचपन की तोतली बोली को, मन मोहने दो
अंगुलियाँ पकड़- पकड़ , यहाँ से वहां डोलने दो

प्यार बेशुमार इनके ,जीवन में भर जाने दो
बचपन को जीने दो, बचपन को संवरने दो





Friday, 4 December 2015

किस्सा न हो जाएँ ये खूबसूरत पल , चलो सहेज लें

किस्सा न हो जायें ये खूबसूरत पत्र, चल्नों सहेज लें

किस्सा न हो जायें ये खूबसूरत पल्,, चलो सहेज लें
किसी के सूने ऑगन में, खुशियों बिखेर दें

बीते हर पल्न को, खूबसूरत कर्म पर अर्पित करें
किसी के सूने आशियाँ को, नन्ही खुशियों से भरें

सामर्थ्य को सहेज कर , कल्याण हित समर्पित करें
किसी के खामोश जीवन में, खुशियों के रंग भरें

गुनगुनायें कुछ गीत, कुछ अर्थपूर्ण लेखन करें
गुमराह होती युवा ऊर्जा का , पथ--प्रदर्शित करें 

जिज्ञासाओं को न विराम दें, कुछ नए पथ निर्मित करें
हो जायें पथ--प्रदर्शक , औरों का जीवन संवारें

तटस्थ हो जीवन जियें, ऊर्जा को संचित करेँ
दे दिल्लासा औरों को , उनके कष्टों को हरें

आँधियों से न डरे, स्वयं को पुष्पित करें
आडम्बरों से परे हट, संस्कारों को सहेज लें

स्वयं को कर अलौकिक , राष्ट्र पथ पर बढ़ें
किसी की दोजख जिन्दगी को , जन्नत सा रोशन करें

अनुपम आदर्शों से हो सुशोभित , स्वयं को गर्वित करें
चीर कर तम को इस जहां से , कल्याण हित कर्म करें

निकृष्ट कोई कर्म न हो , सत्मार्ग पर बढ़ते चलें
पुष्पित हो सारी भावनायें, खिल जाएँ सारी शुभकामनायें

किस्सा न हो जायें ये खूबसूरत पल, चलो सहेज लें
किसी के सूने आँगन मैं, खुशियाँ बिखेर दें







Wednesday, 2 December 2015

दीपों की लड़ियों से रोशन यह त्यौहार


दीपों की लड़ियों से रोशन यह त्योहार

दीपों की लड़ियों से रोशन यह त्यौहार
आओ हम मिल  करें, भारतीय संस्कृति को साकार

दूर करें अंधियारा मन का , पावन यह त्यौहार
आओ हम सब मिल करें . राम के आदर्शों को साकार

दीपों की एक माला बनायें, रोशन घर ऑगन
बांटे मिठाई , दैवें बधाई, पुष्पित हों तन--मन

धन की देवी कष्ट मिटायें, भरे रहें भण्डार
जीवन मैं खुशियाली लाता, पावन यह त्यौहार

चलो चलें पावन गंगा के तीर, दीप जला  आयें
पावन सरिता के आँचल तले. हम जीवन पायें 

अगवान्‌ राम के आदर्श को . जीवन में अपनायें
चलों चलें किसी निर्धन की कुटिया को रोशन कर आयें

अंधियारे को दूर भगाता, पावन यह त्यौहार
खुशियों का अम्बार लगाता, पावन यह त्यौहार

कामनाओं को पूरी करता , पावन यह त्योहार
घर - ऑँगन को पुष्पित करता , पावन यह त्यौहार

दीपों की लड़ियों से रोशन यह त्यौहार
आओ हम मिल् करें, भारतीय संस्कृति को साकार

दूर करें अंधियारा मन का , पावन यह त्यौहार
आओ हम सब मिलनकरें  , राम के आदर्शों को साकार





Tuesday, 1 December 2015

गोविन्द नाम जप लो , गोपाल नाम जप लो

गोविन्द नाम जप लो , गोपाल नाम जप लो

गोविन्द नाम जप लो, गोपाल्र नाम जप लो
श्रीकृष्ण नाम जप लो, और राधे नाम जप लो

श्रीराम नाम जप लो, श्री सीते नाम जप लो
श्री गोविन्द नाम जप लो, श्री गोपाल नाम जप लो

भोले का नाम जप लो, गौरा का नाम जप लो
श्री विष्णु का नाम जप लो , श्री लक्ष्मी का नाम जप लो

मोहन का नाम जप लो, मुरारी का नाम जप लो
ग्वाले का नाम जप लो, कन्हैया का नाम जप लो

ओले हैं जो भंडारी, सब उनका नाम जप लॉ
जो पालते हैं हमको, उन हरि का नाम जप लो

माखन जिन्हें  है प्यारा, उस कान्हा का नाम जप लो
गौऊअन को चराने वाले, ग्वाले का नाम जप लो

रघुनन्दन का नाम जप लो, जानकी वल्लझ का नाम जप लो
रामचंद्र का नाम जप लो, सीतापति का न्यम जप लो

एकदंत का नाम जप लो, लम्बोदर का नाम जप लो
गजानन का नाम जप लो, गणपति का नाम जप लो

गिरिधर का नाम जप लो, घनश्याम का नाम जप लो
माधव का नाम जप लों, मुरारी का नाम जप लो

केशव का नाम जप लो, वासुदेव का नाम जप लो
शिव का नाम जप लो, शंकर का नाम जप लो

आशुतोष का नाम जप लो, महेश का नाम जप लो
गोविन्द नाम जप लो, गोपाल नाम जप लो








इस परेशां दिल को और परेशां न करो - ग़ज़ल

इस परेशां दिल को और परेशां न करो

इस परेशां दिल को , और परेशां न करो
इस गमे दिल को और गमसार न करो

मैं जानता हूँ मुझसे कोई खता नहीं हुई
इस खुदा के बन्दे को यूं परेशां न करों

उसे अज़ीज़ हूँ मैं, ये जानता हूँ मैं
उस खुदा की जानिब , मुझे परेशां न करो

मुझे गिला नहीं . दुनिया ने किनारा कर लिया मुझसे
इस खुदा के बन्दे को, और परेशां न करो

किस्मत ने मेरी हमेशा धोखा दिया मुझे
इस बेक़सूर को और परेशां न करो

मुझे ख्याल है उसके बन्दों की खिदमत मैं करें
इस खुदा के नूर को यूं , रुसवा न करो

मेरी नहीं कोई ख्वाहिश ऐ मेरे खुदा
तेरा दर हो मैरा ठिकाना, यूं गुमराह न करो

गुमसुम- गुमसुम सी जिन्दगी को कर लिया बसेरा मैंने
गुजारिश है इस गम्दीदा को यूं बेसहारा न करो

इस गुलशान में  गुल बन खिल सकूं,  है ये आरज़ू मेरी
खिलने से पहले ही मुझे शाख से , जुदा न करो

किसी के उजाड़ आशियाँ को रोशन करूँ ये आरज़ू मेरी
इस नाचीज़ की जिन्दगी को यूं जहन्नुम न करों






सपनों की महफ़िल सजायें

सपनों की महफ़िल सजायें

सपनों की महफिल सजायें . चल्लो कुछ नए गीत बनायें
तारों को धरती पर लायें . चलो चाँद पर होकर आयें

ढूंढकर उस खुदा का घर . चलो उससे मित्रकर आयें
वीरान हो रही जिंदगियों को. चल्नो दो पल ले लिए हँसा आयें

वक़्त की नाजुकता को समझें. चलो वक़्त से दोस्ती बढ़ायें
डूबती संस्कृति. संस्कारों की नाव को , चलो किनारे पर लायें

फूलों को डालियों का साथ मिले. चल्नों कुछ ऐसा कर आये
किसी की अंधेरी रातों मैं. चलो कुछ दीपक जला आयें

माँ की लोरियों को सुना, चलो बच्चों को सुल्रा आयें
माँ के आँचल तले. चलो कुछ पल गुजारकर आयें

बुरे वक्‍त के दौर से गुजर रही दुनिया, चल्लो उम्मीद का एक दीपक जलायें
बिखर रहे हैं सामाजिकता के मोती, चलो मित्रकर रहना सिखायें

बीतते वक़्त के साथ भर जाते हैं ज़ख्म, चलो ये एहसास जगायें
आधुनिकता के समंदर से बचना होगा, चलो युवा पीढ़ी को समझायें

किसी के सपनों को मिले पंखों का सहारा. चल्रो ऐसा कुछ कर आर्यें
खुदा की राह हों जिन्दगी का सबब. चल्रो इब्रादत को मकसद बनायें

सपनों की महफ़िल्र सजायें , चलो कुछ नए गीत बनायें
तारों को धरती पर लायें , चलो चाँद पर होकर आयें





यूं ही खामोश गुजर रही है - ग़ज़ल

यूं ही खामोश गुजर रही है मेरी हर एक शाम

यूं ही खामोश गुजर रही है .मेरी हर एक शाम
किसी की बाहों में गुजर हो जाए मेरी हर एक शाम तो अच्छा हो

चेहरे पर नूर नहीं . होठों पर मुस्कान नहीं
सुबह किसी की मुस्कराहट से, गुलजार हो जाए तो अच्छा हो

गुलशन , मेरी जिन्दगी के गुलजार नहीं हैं .फूलों की रौनक से
खिलें जो कुछ फूल मेरे गुलशन में भी तो अच्छा हो

जी रहे हैं सभी , खुशनुमा रातों के इंतज़ार में
मैं किसी की ग़मगीन रातों का हमसफ़र, हो जाऊं तो अच्छा हो

खुशियाँ कम और कॉटों भरी हो रही जिन्दगी सबकी
मैं किसी की कॉर्टो भरी राहों में फूल बनकर ,बिखर जाऊं तो अच्छा हो

जी रहे हैं सभी . पर चेहरों से मुस्कान है नदारद
मैं किसी के सुर्ख होठों की मुस्कान ,हो जाऊं तो अच्छा हो

क्यों किसी का दिल , बेजारों सी जिन्दगी का हो साथी
दूर होकर भी मैं किसी के दिल के करीब .हो जाऊं तो अच्छा हो

जी रहे हैं सब इस जहाँ में , एक वीराने आशिरयों में
खिलाकर कुछ फूल इस आशियाँ में , फिर रुखसत हो जाऊं तो अच्छा हो