लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Tuesday, 1 December 2015

गोविन्द नाम जप लो , गोपाल नाम जप लो

गोविन्द नाम जप लो , गोपाल नाम जप लो

गोविन्द नाम जप लो, गोपाल्र नाम जप लो
श्रीकृष्ण नाम जप लो, और राधे नाम जप लो

श्रीराम नाम जप लो, श्री सीते नाम जप लो
श्री गोविन्द नाम जप लो, श्री गोपाल नाम जप लो

भोले का नाम जप लो, गौरा का नाम जप लो
श्री विष्णु का नाम जप लो , श्री लक्ष्मी का नाम जप लो

मोहन का नाम जप लो, मुरारी का नाम जप लो
ग्वाले का नाम जप लो, कन्हैया का नाम जप लो

ओले हैं जो भंडारी, सब उनका नाम जप लॉ
जो पालते हैं हमको, उन हरि का नाम जप लो

माखन जिन्हें  है प्यारा, उस कान्हा का नाम जप लो
गौऊअन को चराने वाले, ग्वाले का नाम जप लो

रघुनन्दन का नाम जप लो, जानकी वल्लझ का नाम जप लो
रामचंद्र का नाम जप लो, सीतापति का न्यम जप लो

एकदंत का नाम जप लो, लम्बोदर का नाम जप लो
गजानन का नाम जप लो, गणपति का नाम जप लो

गिरिधर का नाम जप लो, घनश्याम का नाम जप लो
माधव का नाम जप लों, मुरारी का नाम जप लो

केशव का नाम जप लो, वासुदेव का नाम जप लो
शिव का नाम जप लो, शंकर का नाम जप लो

आशुतोष का नाम जप लो, महेश का नाम जप लो
गोविन्द नाम जप लो, गोपाल नाम जप लो








इस परेशां दिल को और परेशां न करो - ग़ज़ल

इस परेशां दिल को और परेशां न करो

इस परेशां दिल को , और परेशां न करो
इस गमे दिल को और गमसार न करो

मैं जानता हूँ मुझसे कोई खता नहीं हुई
इस खुदा के बन्दे को यूं परेशां न करों

उसे अज़ीज़ हूँ मैं, ये जानता हूँ मैं
उस खुदा की जानिब , मुझे परेशां न करो

मुझे गिला नहीं . दुनिया ने किनारा कर लिया मुझसे
इस खुदा के बन्दे को, और परेशां न करो

किस्मत ने मेरी हमेशा धोखा दिया मुझे
इस बेक़सूर को और परेशां न करो

मुझे ख्याल है उसके बन्दों की खिदमत मैं करें
इस खुदा के नूर को यूं , रुसवा न करो

मेरी नहीं कोई ख्वाहिश ऐ मेरे खुदा
तेरा दर हो मैरा ठिकाना, यूं गुमराह न करो

गुमसुम- गुमसुम सी जिन्दगी को कर लिया बसेरा मैंने
गुजारिश है इस गम्दीदा को यूं बेसहारा न करो

इस गुलशान में  गुल बन खिल सकूं,  है ये आरज़ू मेरी
खिलने से पहले ही मुझे शाख से , जुदा न करो

किसी के उजाड़ आशियाँ को रोशन करूँ ये आरज़ू मेरी
इस नाचीज़ की जिन्दगी को यूं जहन्नुम न करों






सपनों की महफ़िल सजायें

सपनों की महफ़िल सजायें

सपनों की महफिल सजायें . चल्लो कुछ नए गीत बनायें
तारों को धरती पर लायें . चलो चाँद पर होकर आयें

ढूंढकर उस खुदा का घर . चलो उससे मित्रकर आयें
वीरान हो रही जिंदगियों को. चल्नो दो पल ले लिए हँसा आयें

वक़्त की नाजुकता को समझें. चलो वक़्त से दोस्ती बढ़ायें
डूबती संस्कृति. संस्कारों की नाव को , चलो किनारे पर लायें

फूलों को डालियों का साथ मिले. चल्नों कुछ ऐसा कर आये
किसी की अंधेरी रातों मैं. चलो कुछ दीपक जला आयें

माँ की लोरियों को सुना, चलो बच्चों को सुल्रा आयें
माँ के आँचल तले. चलो कुछ पल गुजारकर आयें

बुरे वक्‍त के दौर से गुजर रही दुनिया, चल्लो उम्मीद का एक दीपक जलायें
बिखर रहे हैं सामाजिकता के मोती, चलो मित्रकर रहना सिखायें

बीतते वक़्त के साथ भर जाते हैं ज़ख्म, चलो ये एहसास जगायें
आधुनिकता के समंदर से बचना होगा, चलो युवा पीढ़ी को समझायें

किसी के सपनों को मिले पंखों का सहारा. चल्रो ऐसा कुछ कर आर्यें
खुदा की राह हों जिन्दगी का सबब. चल्रो इब्रादत को मकसद बनायें

सपनों की महफ़िल्र सजायें , चलो कुछ नए गीत बनायें
तारों को धरती पर लायें , चलो चाँद पर होकर आयें





यूं ही खामोश गुजर रही है - ग़ज़ल

यूं ही खामोश गुजर रही है मेरी हर एक शाम

यूं ही खामोश गुजर रही है .मेरी हर एक शाम
किसी की बाहों में गुजर हो जाए मेरी हर एक शाम तो अच्छा हो

चेहरे पर नूर नहीं . होठों पर मुस्कान नहीं
सुबह किसी की मुस्कराहट से, गुलजार हो जाए तो अच्छा हो

गुलशन , मेरी जिन्दगी के गुलजार नहीं हैं .फूलों की रौनक से
खिलें जो कुछ फूल मेरे गुलशन में भी तो अच्छा हो

जी रहे हैं सभी , खुशनुमा रातों के इंतज़ार में
मैं किसी की ग़मगीन रातों का हमसफ़र, हो जाऊं तो अच्छा हो

खुशियाँ कम और कॉटों भरी हो रही जिन्दगी सबकी
मैं किसी की कॉर्टो भरी राहों में फूल बनकर ,बिखर जाऊं तो अच्छा हो

जी रहे हैं सभी . पर चेहरों से मुस्कान है नदारद
मैं किसी के सुर्ख होठों की मुस्कान ,हो जाऊं तो अच्छा हो

क्यों किसी का दिल , बेजारों सी जिन्दगी का हो साथी
दूर होकर भी मैं किसी के दिल के करीब .हो जाऊं तो अच्छा हो

जी रहे हैं सब इस जहाँ में , एक वीराने आशिरयों में
खिलाकर कुछ फूल इस आशियाँ में , फिर रुखसत हो जाऊं तो अच्छा हो





Friday, 6 November 2015

तेरे दर पर आये साईं

तेरे दर पर आये साईं हम भिखारी बनकर

तेरे दर पर आये साई , हम भिखारी बनकर
भर दे तू झोली , सबकी साईं दाता बनकर

बेऔलादों वालों को तू , औलाद देना
खाली आशियों को साईं , खुशियों से भर देना

हम जानते हैं ,तू है कारसाज बड़ा
आये जो दर पर तेरे , खाली न कोई खड़ा

डूबती नैया को साईं , पार लगा देना
दीन -- दुखियों को साईं , खुशियाँ अपार देना

हम तो हैं बालक तेरे , हम पर हो एतबार तुझे
जी रहे हैं तेरे दम से , तुझ पर भरोसा है हमें

किस्मत हमारी साईं , चमके तेरे करम से
सोते जागते साईं नाम , तेरा हो लब पे

ख्वाहिश है साईं , दीदार तेरा हो हमें
तेरे बन्दों की , सेवा से नवाज दे  हमें

गिर जो जाएँ तो , संभालना मेरे साईं
तेरे नाम के सहारे , जिन्दगी कटे मेरे साईं

तेरे दर पर आये साईं , हम भिखारी बनकर
भर दे तू झोली , सबकी साईं दाता बनकर






किसे मैं अपना कहूं और किसे कहूं बेगाना

किसे मैं अपना कहूं और किसे कहूं बेगाना

किसे मैं अपना कहूं और किसे कहूं बेगाना ऐ मेरे खुदा
इस जहां के हर एक बन्दे में तेरा नूर नजर आता है मुझे

मैं जो भी लिखूं ऐ मेरे खुदा, पाकीजगी अता करना माला उसमे
हर एक लफ्ज़ में तेरा एहसास शामिल हो ऐ मेरे खुदा

मेरे इम्तिहां न लेना , अपना शागिर्द करना मुझको
आँखें खुली हो या हो बंद , तेरी इबादत का एहसास करा मुझको

तेरी इबादत को अपना मजहब कर लूं ऐ मेरे खुदा
जियूं तो तेरे नाम से, मरूं तो लब पर तेरा नाम हो ऐ मेरे खुदा

इल्म-ए --- इबादत से नवाज़ मुझको ऐ मेरे खुदा
आशियाँ मेरा तेरे करम से रोशन हो ऐ मेरे खुदा

तेरे इक इशारे पर दो जहां को ठुकरा दूं ऐ मेरे खुदा
मरने पर भी इबादत ए जन्नत का आसरा नसीब हो मुझको ऐ मेरे खुदा

मैं तेरी इबादत को अपनी मकसदे जिन्दगी कर लूं ऐ मेरे खुदा
मेरी इस आरज़ू को करम अत्ता करना माला

हो जाऊं मैं आदिल, मेरा नूर आफताब सा हो रोशन
मेरी किस्मत को आब--ए---आइना की तरह कर रोशन

मुझे भी चैन, दो पल का आराम नसीब हो ऐ मेरे खुदा
आहिस्ता ही सही , मेरा भी इकबाल बुलंद हो ऐ मेरे खुदा

आलम ये है कि मैं दो पत्र भी तेरे बगैर जी न सकूं
 इबादते--जूनून को अपने करम से परवान चढ़ा ऐ मेरे खुदा

मेरे क़दमों के निशाँ , दूसरों की जिन्दगी का सबब हो जाएँ
कुछ इस तरह से बुलंद कर किस्मत मेरी ऐ मेरे खुदा










Thursday, 5 November 2015

कुछ पाने की तमन्ना

कुछ पाने की तमन्ना

कुछ पाने की तमन्ना , तसव्वुर से क्‍यों कर गुजरे
चलो हकीकत को , मंजिल का आशियाँ करें

गम क्या तुझको, गर मंजिल तेरा नसीब नहीं
कोशिशों पर यकीन, तेरे नसीब का हो हिस्सा

जिन्दगी रोशन करने के लिए, रात के दो पल ही काफी हैं
दिन को रात कहने की जिद, करते हैं लोग क्यों

गले का हार हो जाओ तुम, दो पल के लिए ही सही
इस दिल को तेरे पहलू की आरज़ू , खता तो नहीं

बेगाना समझ यूं मुझसे , मुंह न फेर सनम
इस दिल को तेरी आरज़ू, कोई गुनाह तो नहीं

तेरे पहलू में गुजरें मेरी सुबह और शाम ये आरजू है मेरी
यूं ही नहीं किया मैंने , तुझे अपनी जिन्दगी में शामिल

तेरी इबादत मेरी जिन्दगी का मकसद हो जाए
यूं ही नहीं इश्क को इबादते--खुदा कहते हैं

कुछ पाने की तमन्ना , तसव्वुर से क्‍यों कर गुजरे
चलो हकीकत को , मंजिल का आशियाँ करें

गम क्या तुझको, गर मंजिल तेरा नसीब नहीं
कोशिशों पर यकीन, तेरे नसीब का हो हिस्सा







वक़्त के दरिया के पार जो उतरना जाने

वक़्त के दरिया के पार जो उतरना जाने 

वक़्त के दरिया के पार जो उतरना जाने 
मंजिल उसको नसीब होती है

इंसानियत को जो अपना मजहब माने
जिन्दगी उसको नसीब होती है

चार वक़्त की जो नमाज़ करना जाने 
इबादत उसको नसीब होती है

दूसरों के गमों को जो अपना माने
जिन्दगी उसको नसीब होती है

वक़्त की पाकीजगी में जो  ढलना  जाने 
शोहरत उसको नसीब होती है

दूसरों के दर्दे - गम को जो अपना माने
जिन्दगी उसको नसीब होती है

वक़्त की नाव में बैठ, जो पार उतरना जाने 
अमानते- इल्म उसको नसीब होती है

दूसरों के गम में जो शरीक हो . जो खुद के ग॒मों को भूले
जिन्दगी उसको नसीब होती है












जिनकी खुद की किस्मत रोशन नहीं होती

जिनकी खुद की किस्मत , रोशन नहीं होती
क्या वे किसी का , सहारा नहीं होते

जिनकी किस्मत में,  सितारे नहीं होते
क्या उनके जीवन में  , किनारे नहीं होते

जिनकी खुद की किस्मत , दर्दे - ग॒मों का साया है
क्या उनसे किसी की किस्मत , रोशन नहीं होती

ये दुनिया दर्दे - गमों का , समंदर है
चलते रहने से क्या  , दुनिया रोशन नहीं होती

सितारे चाँद को देखकर
यूं रोया नहीं करते

करते हैं खुद को बुलंद

यूं निराश हुआ नहीं करते

जुदाई के गम में
खुद को यूं , रुलाया नहीं करते

रोशन करते हैं , औरों की किस्मत
खुद को यूं , मिटाया नहीं करते

किसी की तरक्की को देखकर
यूं दिल को जलाया नहीं करते

बिछाते हैं फूल दूसरों की राहों में
खुद को यूं सताया नहीं करते


बेहोशी के आल्रम में
यूं रोशन दीपक हुआ नहीं करते

पीते हैं वो
जो जिन्दगी को जिन्दगी समझा नहीं करते












Wednesday, 4 November 2015

पूछूं पता किससे तेरा, कोई नहीं यहाँ है मेरा

पूछूं पता किससे तेरा, कोई नहीं यहाँ है मेरा

पूछूं पता किससे तेरा, कोई नहीं यहाँ है मेरा
ये दुनिया तेरी  मायाजाल है , कोई नहीं इंसान यहाँ

जो चीरहरण का हिस्सा हैं, उन्हें तेरा पता क्या मालूम होगा
जो  बहा रहे हैं खून, उनका तुझसे क्या कोई नाता होगा

रिश्तों को जो कर रहे हैं तार – तार, वो बता सकेंगे क्या ठिकाना तेरा
धर्म की राजनीति करने वालों को , क्या तेरे दर का पता होगा

अप्राकृतिक कृत्यों में लिप्त, मानव चरित्रों को क्या तुझसे कोई सरोकार होगा
इस लोक को जो न स्वर्ग समझे, परलोक उनका क्या सार्थक होगा

आधुनिक विचारों से पोषित चरित्रों को, सामाजिकता से क्या सरोकार होगा
तिलांजलि दे रहे आदर्शों को जो चरित्र, उनका संस्कारों से क्या कोई नाता होगा

कुविचारों का कर रहे जो समर्थन, क्या उनका आदर्शों से कोई लगाव होगा
संस्कृति जिनके जीवन में मायने नहीं रखती , उनका जीते जी क्या हश्र होगा

सात्विक विचारों में नहीं रूचि उनकी, उनके जीवन का अंत कैसा होगा
मर्यादाओं में बंधकर रहना जिनको मंज़ूर नहीं , उनके जीवन में क्या खुशबुओं का कोई मंज़र होगा

अभिनन्दन की राह जिनको नहीं भाती, उनका जीवन क्या उत्कर्ष से भरा होगा
इबादत जिनके दैनिक जीवन का हिस्सा नहीं, क्या उन्हें खुदा से कोई सरोकार होगा

आत्मीयता जिनके चरित्र को नहीं भाती , क्या सत्मार्ग से उनको कोई सरोकार होगा
संवेदनहीनता को बना लिया जिन्होंने अपने जीवन का सबब, क्या मानवता उनके जीवन का धर्म होगा

पूछूं पता किससे तेरा, कोई नहीं यहाँ है मेरा
ये दुनिया तेरी  मायाजाल है , कोई नहीं इंसान यहाँ

जो चीरहरण का हिस्सा हैं, उन्हें तेरा पता क्या मालूम होगा
जो  बहा रहे हैं खून, उनका तुझसे क्या कोई नाता होगा