लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 11 September 2016

हे मन बसिया , हे मन बसिया - भजन


हे मन बसिया , हे मन बसिया

हे मन बसिया , हे मन बसिया
भक्ति की जोत जलाओ मेरे रसिया
मृग तृष्णा से हमें बचाओ
मन मंदिर बस जाओ मोरे रसिया

करूँ प्रार्थना हाथ जोड़ मैं
ज्ञान की राह दिखाओ मन बसिया
पर निंदा से बचा रहूँ मैं
सत्संग मार्ग ले जाओ मोरे रसिया

मन को मेरे पावन करना
किसलय सा कोमल मन रसिया
अहंकार मुझको छूवे
अभिनन्दन की राह ले जाओ मन बसिया

चरण कमल तेरे मैं बलि  - बलि जाऊं
कृपा करो मेरे मन बसिया
सौभाग्य से  मुझको रोशन करना
सच का ज्ञान कराओ मोरे रसिया


मेरा भरोसा कायम रखना
मुझको दास बनाओ मेरे रसिया
तेरी दया का पात्र बनूँ मैं
मुझको अपना बनाओ मन बसिया

भोग  - विलास में मैं उलझूं
उपकार करो मेरे मन बसिया
पर उपकार जीवन हो मेरा
कर्तव्य मार्ग पर लाओ रसिया

अनुनय विनय करूँ मैं प्रभुजी
मुझको दरश दिखाओ मन बसिया
पुष्प बन उपवन खिलूँ मैं
ऐसे भाग्य जगाओ मन बसिया

प्रभु भक्ति में जीवन गुजरे
भक्ति की जोत जलाओ मोरे रसिया
मुक्ति जीवन उद्देश्य हो मेरा
मोक्ष की राह दिखाओ रसिया

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