लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 16 August 2015

मशाल जलाओ कि बहुत अँधेरा है

मशाल जलाओ कि बहुत अन्धेरा है
संगीत की रागिनी सुनाओ कि हुआ सवेरा है
आये हैं वो हमारी महफ़िल में हम
खुशकिस्मत हैं
सुनाओ संगीत कि लगा संगीत का मेला है




नदियाँ यूं ही कल - कल नहीं करतीं
जंगल यूं ही आबाद नहीं होते
मंजिल मिलती नही उनको 
जिनके हौसले बुलंद नहीं होते



अपने जोश को जान दो
अपने प्रयासों को परवान दो
मंजिलें यूं ही आसां नहीं होतीं
अपने इरादों में जान दो



अपनी कोशिश में पवित्रता लाओ
अपने प्रयासों को अपना मुस्तकबिल बनाओ
अपनी कोशिश को खुदा की इबादत समझो
अपने प्रयासों में पाकीज़गी लाओ

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