लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 4 August 2015

बादलों की ओट से चाँद भी मुस्कुराएगा

बादलों की ओट से चाँद भी मुस्कुराएगा

बादलों की ऑट से ,चॉंद भी मुस्कुराएगा 
गर जो तू उस खुदा की ,इबादत के गीत गायेगा 

तेरा  नाम और तेरी कीर्ति का , परचम लहराएगा
गर जो तू उस खुदा के ,चरणों में  शीश झुकाएगा 

रोशन  होगा तेरा कल , तेरा नाम जगमगायेगा
मर जौ तू किसी भटके राही को ,राह दिखाएगा

यूं ही नहीं जहां  , तुझे शीश पर बैठायेगा
 गर  तेरा प्रयास मानवता की राह दिखायेगा

सितारों की दुनिया मैं ,तैरा नाम भी जुड़ जाएगा.
गर जो  तू दुनिया को ,सत्मार्ग  दिखाएगा

होगा तेरा भी  अभिनन्दन . तू विशिष्ट हो जाएगा.
गर जौ तू उस खुदा की ,राह पर जाएगा

सुमंगल होंगे ते प्रयास सभी ; तेरा कल जगमगायेगा
मर जो  तू ,संकल्प की राह अपनाएगा

अभिवादन तेरा भी होगा , तू सूर्य सा रौशन हैं जाएगा
'गर जो  तेरे आदर्शों से ,यह जग जगमगायेगा.

अदितीय हौगा तेरा व्यक्तित्व , तेरा कल पुरस्कार पायेगा
गर जो तू दूसरों को , पीड़ा से मुक्त कराएगा.

संस्कृति और संस्कारों की ,धरोहर तू हो जाएगा.
गर तैरा जीवन औरों के लिए ,वरदान हो जाएगा.

बादलों की ऑट से ,चॉंद भी मुस्कुराएगा 
'गर जो तू उस खुदा की ,इबादत के गीत गायेगा 

तेरा  नाम और तेरी कीर्ति का , परचम लहराएगा
गर जो तू उस खुदा के ,चरणों में  शीश झुकाएगा 



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