लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 17 May 2020

राष्ट्रभाषा खोजता एक राष्ट्र


राष्ट्रभाषा खोजता एक राष्ट्र  

राष्ट्रभाषा खोजता एक राष्ट्र
अजीब उलझन में उलझा
कुत्सित राजनीति का हिस्सा हो
क्षेत्रीयवाद की चक्की में पिसता

राष्ट्रभाषा खोजता एक राष्ट्र

यह राष्ट्र कभी एक राष्ट्र हो ही न पाया
क्षेत्रीय राजनीति की बलि चढ़ता
क्ष्तेत्रिय भाषाओं के तले दबा
कुत्सित संस्कारों के समंदर में तैरता – उतराता एक राष्ट्र

राष्ट्रभाषा खोजता एक राष्ट्र

इसकी अपनी ही क्षेत्रीय संस्कृति
इसके गले की हड्डी बन उभरी
मेरी तेलुगु, मेरी तमिल, मेरी मलयालम
इन्हीं चक्रव्यूह में फंस कर रह गया एक राष्ट्र

राष्ट्रभाषा खोजता एक राष्ट्र

अपने  - अपने वर्चस्व की लड़ाई में उलझते
एक – दूसरे को नीचा दिखाने की दुर्भावना से ओतप्रोत
राष्ट्र को नगण्य मानने की कुत्सित सोच
संस्कृति एवं संस्कारों की बलि चढ़ गया एक राष्ट्र

राष्ट्रभाषा खोजता एक राष्ट्र

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