लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 12 July 2016

रोशन मेरी सुबह और शाम हो जाये

रोशन मेरी सुबह और शाम हो जाए

रोशन मेरी सुबह और शाम , हो जाए
उस खुदा का मुझ पर , करम जो हो जाए

सागर सा विशाल हदय, मेरा हो जाए.
उस खुदा का मुझ पर , करम जो हो जाए

मेरी कोशिशों को मंजिल , नसीब हो जाए
उस खुदा का मुझ पर ,करम जो हो जाए

मेरे नाम की गली--गली , चर्चा हो जाए
उस खुदा का मुझ पर , करम जो हो जाए

इंसानियत की राह मेरी जिंदगी का , मकसद हो जाए.
उस खुदा का मुझ पर , करम जो हो जाए

मेरी भी स्याह रातों में भी , उजाला हो जाए.
उस खुदा का मुझ पर , करम जो हो जाए

मेरे जायज़ अरमानों को , मंजिल नसीब हो जाए
उस खुदा का मुझ पर करम जो हो जाए.








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