लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Friday, 4 September 2015

सदविचार - अनिल कुमार गुप्ता के स्वतंत्र विचार

सदविचार ( मेरे स्वतंत्र विचार )

* विवेक जीवन को ऊँचाइयों की ओर प्रस्थित करता है जबकि
अविवेक विनाश की ओर |

* लालसा लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग से मनुष्य को श्रमित करती है |

* कर्तव्य मार्ग पर बढ़ते रहना स्वयं को अभिनन्दन मार्ग की
ओर ले जाना है |

* किसी का उपहास स्वयं को अहंकारी पारिभाषित करना है |

* अपराधबोध तब होता है जब हम किसी कार्य के प्रति
ईमानदार नहीं होते |

* ईमानदार चरित्र किसी देश की सामाजिक एवं संस्कृतिक
धरोहर होते हैं |

* लेखक जब किसी विषय पर चिंतन प्रक्रिया से गुजरकर लेखन
कार्य करता है तब वह उस विषय के साथ न्याय करता है |

* संदेह सुविचारों को भी कुविचारों में परिवर्तित कर दिशा
भ्रमित करता है |

सदविचार - अनिल कुमार गुप्ता के स्वतंत्र विचार

सदविचार ( मेरे स्वतंत्र विचार )

« अनुशासित जीवन लक्ष्य प्राप्ति का सबसे
उत्तम मार्ग है |

« अनुशासन कम प्रयासों से लक्ष्य प्रासि का
सर्वोत्तम साधन है |

« आदर्शों का पीछा करना जीवन का उद्देश्य
नहीं होना चाहिए अपितु आदर्श स्थापित
करना जीवन का मूल उद्देश्य होना चाहिए |

« नैतिकतापूर्ण आचरण में ही संस्कृति व
संस्कारों की धरोहर झलकती है |

सदविचार ( अनिल कुमार गुप्ता के स्वतंत्र विचार )

सदविचार ( मेरे स्वतंत्र विचार )

« अहंकार सत्य मार्ग से भटकाव का सूचक है |
« अहंकार पूर्णता से अपूर्णता की और प्रस्थित करता है
« अहंकार व्यवहार अशुभ का आमंत्रण है |
« अल्पभाषी होना स्वयं को संयमित करना है
« आस्तिकता केवल और केवल सत्य से ओतप्रोत होना है |
« दूरदर्शिता अनुकूल परिणामों का पर्याय है |
« संकल्प प्रयासों को बल देता है |

अहंकार - 2 ( अनिल कुमार गुप्ता के स्वतंत्र विचार )

अहंकार ( मेरे स्वतंत्र विचार )

« अहंकार सबल को निर्बल बनाता है |
« अहंकार सच्चरित्र को दुश्वरित्र मैं परिवर्तित करता है |
« अहंकार मनुष्य को अधोगति की ओर ले जाता है
« अहंकार मानव को अविवेकी बना देता है
« अहंकार विषाद का पर्याय है |
« अहंकार असत्य को परिभाषित करने का
असफल प्रयास करता है |

अहंकार (अनिल कुमार गुप्ता के स्वतंत्र विचार )

अहंकार (मेरे स्वतंत्र विचार )

« अहंकार का भाव विनाश का सूचक है |
« अहंकार अतिस्वाभिमान के अहं से पुष्पित होता है |
« अहंकार मानसिक दुर्बलता का सूचक है |
« अहंकार सुबुद्धि पर प्रयक्ष प्रहार करता है |
« अहंकार अभिनन्दन मार्ग से भटकाता है |
« अहंकाएपूर्ण व्यक्तित्व आदर्श स्थापना का पर्याय नहीं हो
सकता |

Thursday, 3 September 2015

चार दिन की जिन्दगी

चार दिन की जिन्दगी को यूं ही न
बेकार कर

अपनी कोशिशों से कुछ फूल
खिलाकर जाओ

चार दिन की जिन्दगी को
यूं ही न करें नापाक

चलो इंसानों की करें खिदमत
कुछ पल करें खुदा की इबादत

चार दिन की जिन्दगी को
यूं ही न बिसार तू
उत्कर्ष की राह वर
अभिनन्दन की राह वर

चार दिन की जिन्दगी
यूं ही न जाए बीत

आओ मिल करें कुछ प्रयोजन
जीवन के उत्कर्ष का

चार दिन की जिन्दगी को
यूं ही न बिसरायें हम

बन कर खिलें तारे ज़र्मी पर
यूं ही न बिखर जाएँ हम

चार दिन की जिन्दगी
यूं ही न हो जाए अभागी

चलो लक गधा गंगा को पावन करें हम
संस्कृति और संस्कारों का प्रचार करें हम

चार दिन की जिन्दगी
उपहास का पर्याय न हो जाए

अहंकार का त्याग कर
स्वाभिमान को माथे धरें हम












चाँद को आशियाँ बनाने में क्या रखा है

चाँद को आशियाँ बनाने में क्या रखा है


चाँद को आशियाँ बनाने में क्‍या रखा है
चलो इस धरती को चाँद सा रोशन कर दें

आसमां को छूने की गर है तमन्ना तेरी
अपने पंखों को हौसलों की उड़ान से रोशन कर लो

माना राहों में आता है मुश्किलों का समंदर
हौसलों ने किये स्थापित आदर्शों के कीर्तिमान



मैं चाहता हूँ