लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Thursday, 29 April 2021

पीर दिल की छुपाने की जरूरत क्या है

 

पीर दिल की छुपाने की जरूरत क्या है

 

पीर दिल की छुपाने की , जरूरत क्या है

गम को फना करने के , बहाने हैं बहुत

 

क्यूं कर दूर जाने की , बात करते हो

करीब आने, दिल लगाने के , बहाने हैं  बहुत

 

क्यूं कर रिश्तों में ये , कड़वाहट कैसी

रिश्तों को निभाने के , बहाने हैं   बहुत

 

क्यूं कर ग़मों को सीने से , लगाए बैठे हैं वो

ग़मों को भुलाने, जिन्दगी को मुस्कुराने के , बहाने हैं बहुत

 

क्यूं कर दिल की पीर को , अपनी धरोहर कर लें

खुशियाँ जताने और मुस्कुराने के , बहाने हैं बहुत

 

क्यूं कर किसी की चाहत को , ठुकराए कोई

मुहब्बत जताने और निभाने के , बहाने है बहुत

 

क्यूं कर किसी से दूरियां , बनाते हैं लोग

किसी के करीब आने , सीने से लगाने के , बहाने हैं  बहुत

 

क्यूं कर जिन्दगी को नासूर , बना लेते हैं लोग

पीर दिल की मिटाने और मुस्कराने के , बहाने हैं बहुत

No comments:

Post a Comment