लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Sunday, 4 April 2021

तेरी खामोश निगाहें - गीत

तेरी खामोश निगाहें – गीत

 

तेरी खामोश निगाहें , करतीं हैं बयाँ

तुझे, मुझसे मुहब्बत हो गयी

 

तेरे चहरे का ये नूर, करता है बयाँ

तुझे, मुझसे मुहब्बत हो गयी

 

क्या मैं छू लूं तुझे, मेरी जाने - जां

तुझे, मुझसे मुहब्बत हो गयी

 

तेरी नजरे - करम पर, मैं हूँ फ़िदा

तुझे, मुझसे मुहब्बत हो गयी

 

चंद पल गुजार लूं , तेरी आगोश में

तुझे, मुझसे मुहब्बत हो गयी

 

एक बार मुस्कुरा के , देख जरा

मुझे तुमसे, मुहब्बत हो गयी

 

तेरी गलियों में फिरूं , मैं दीवानों सा

मुझे , तुझसे मुहब्बत हो गयी

 

मेरे आशियाँ को कर दे रोशन , मेरी जाने जां

मुझे , तुमसे मुहब्बत हो गयी

 

तेरी खामोश निगाहें , करतीं हैं बयाँ

तुझे, मुझसे मुहब्बत हो गयी

 

तेरे चहरे का ये नूर, करता है बयाँ

तुझे, मुझसे मुहब्बत हो गयी


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