लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 18 April 2017

वह जिन्दगी भी क्या जिन्दगी और नए एहसास - मुक्तक

१.


आहिस्ता - आहिस्ता जो मंजिल  की ओर  , कदम रखते नहीं

उनके नसीब में  , मंजिल के दीदार होते नहीं .

 
२.


आसमानी खुदा से जो मांगते हैं, जिन्दगी में चैन और सुकून 


रोशन होता है उनकी जिन्दगी का हर पल, रहते हैं वो ग़मों से कोसों दूर 


3.

आ वार पंछी की तरह जीते हैं जो, अपनी जिन्दगी का हर पल 

उनकी जिन्दगी का आशियाँ , कभी रोशन होता ही नहीं 

4.



आसमां से दूर कहीं आशियाँ बनाने की, जुर्रत की है मैंने 

मेरे इस ख़्वाब को उस हुदा का करम, नसीब हो जाए तो अच्छा हो 


5.

आसां है किसी के उजड़ते चमन को देखकर हंस देना 

किसी के उजड़े चमन को रोशन करो , तो कोई बात बने 


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